पंजाब से महाराष्ट्र तक 2,500 किमी की पदयात्रा, युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार का अनोखा संकल्प

Amritsar To Nanded Foot March: युवाओं को नशे से बचाने के लिए पंजाब का एक परिवार बिना जूते-चप्पल के अमृतसर से महाराष्ट्र के नांदेड़ तक 2500 किमी की अनोखी पदयात्रा कर रहा है। जानिए पूरा मामला।
punjab family padyatra amritsar to maharashtra nanded anti drug campaign
येवला पहुंचा पंजाब का परिवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Punjab Family Padyatra Amritsar To Maharashtra: युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पंजाब का एक परिवार अनोखी पहल कर रहा है। यह परिवार बिना जूते-चप्पल के पंजाब से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक करीब 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है। रास्ते में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है।

पदयात्रा कर रहे सरदार लाल सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, हम अमृतसर से आए हैं। हमने अपने गांव से सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ तक लगभग 2,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। पंजाब में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। हम सभी के सुख-समृद्धि और भलाई की अरदास करते हैं। हमारी यह यात्रा युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए समर्पित है। यह मेरा 13वां साल है। हम वर्ष 2013 से लगातार यह यात्रा कर रहे हैं।

नशा युवाओं के लिये गंभीर समस्या

नशे की बढ़ती समस्या आज युवाओं के सामने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता, विशेष रूप से निर्णय लेने वाला हिस्सा यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स विकसित हो रहा होता है। ऐसे में कम उम्र में नशे की शुरुआत जीवनभर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।

परिवार और समाज की भूमिका सबसे अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की रोकथाम के लिए परिवार और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं से खुलकर और संवेदनशीलता के साथ बातचीत करनी चाहिए। माता-पिता और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों की सही जानकारी देना भी जरूरी है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपचार प्रभावी साबित होते हैं।

भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सरकारी सेवाओं के माध्यम से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com