

Highlights
नागपुर सत्र न्यायालय ने कुणाल कान्हेरे हत्याकांड में चारों आरोपियों को बरी किया।
अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में गंभीर खामियां पाईं।
अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे।
अंतिम बार साथ देखे जाने और मौत की जानकारी मिलने के समय में चार घंटे से अधिक का अंतर था।
मृतक के परिजनों ने फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है।
Nagpur Sessions Court Verdict: नागपुर के बहुचर्चित कुणाल कान्हेरे हत्याकांड में नागपुर सत्र न्यायालय ने चारों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध साबित करने में विफल रहा। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में गंभीर त्रुटियां पाए जाने पर सत्र न्यायाधीश एम सलमान आजमी ने यह फैसला सुनाया।
बरी किए गए लोगों में संदीप उर्फ चिंटू बोपचे, आयुष उर्फ कन्नू मेश्राम, कार्तिक उर्फ बाबू सुरसौत और आदित्य उर्फ टकल्या मसराम शामिल हैं। यह वारदात 2 मई 2024 को एमआईडीसी पुलिस थाना क्षेत्र के वृंदावन लेआउट में हुई थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। आरोपियों के खिलाफ अंतिम बार मृतक के साथ देखे जाने, सीसीटीवी फुटेज और कपड़ों की जब्ती जैसे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भरोसा किया गया था। अदालत ने इन साक्ष्यों में कई गंभीर खामियां पाई।
बहुचर्चित कुणाल कान्हेरे हत्याकांड में नागपुर जिला न्यायालय ने पाया कि मृतक को आरोपियों के साथ अंतिम बार देखे जाने और उसकी मौत की जानकारी मिलने के समय के बीच 4 घंटे से अधिक का अंतर था।
आरोपियों के साथ मृतक के घटनास्थल तक जाने का भी ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके अलावा गवाहों को सीसीटीवी फुटेज दिखाकर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित नहीं कराई गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर विशेष रूप से गौर किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों में तालमेल की भारी कमी थी। सत्र न्यायाधीश एम. सलमान आजमी ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में संदेह का लाभ हमेशा आरोपी को मिलता है।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी अकाट्य या ठोस सबूत पेश करने में असमर्थ रहा जो इन चारों आरोपियों को सीधे तौर पर अपराध से जोड़ सके। पुलिस और जांच एजेंसियों की इस लचर कार्यप्रणाली के कारण ही आरोपी कानूनी प्रक्रिया का लाभ पाने में सफल रहे।
फैसला आने के बाद मृतक कुणाल कान्हेरे के परिजनों में गहरी निराशा और आक्रोश देखने को मिला है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें इस बहुचर्चित मामले में न्याय की उम्मीद थी, लेकिन पुलिस और अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी के चलते दोषियों को सजा नहीं मिल सकी।
सामाजिक और स्थानीय स्तर पर भी इस फैसले के बाद न्याय व्यवस्था और पुलिसिया जांच की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, तथा पीड़ित परिवार ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है।