5 कक्षाएं और सिर्फ 2 कमरे! कॉकरोच जनता पार्टी के निरीक्षण में खुली म्हसाला जिप स्कूल की पोल, छात्र बेहाल

Nagpur ZP Schools: नागपुर ग्रामीण के जिप स्कूलों में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत जमीनी हकीकत सामने आई। कहीं कमरों की कमी तो कहीं विद्यार्थियों की कमजोर पढ़ाई मिली।
Nagpur Zilla Parishad School Improvement Campaign
नागपुर जिप स्कूल ठीक करो अभियानसोर्स- सोशल मीडिया
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Nagpur ZP School Infrastructure: नागपुर ग्रामीण क्षेत्रों के जिप स्कूलों में शिक्षा का स्तर, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं और विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू किया है। अभियान की शुरुआत कामठी तहसील के म्हसाला स्थित जिप प्राथमिक स्कूल से की गई। फिलहाल स्कूलों में शिक्षा का स्तर जांचने के बजाय विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी पड़ताल की जा रही है।

मंगलवार को 'कॉकरोच' की टीम ने प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया, यहां पहली से पांचवीं तक पढ़ाई होती है। स्कूल में डेस्क-बेंच, कक्षाओं, मध्यान्ह भोजन, गणवेश, पेयजल और शौचालय की स्थिति संतोषजनक पाई गई। स्कूल के वॉशरूम साफ थे और पेयजल की व्यवस्था भी उचित थी। हालांकि 5 कक्षाओं के लिए केवल 2 कमरे होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

म्हसाला गांव की आबादी करीब 12 हजार है। इसके बावजूद स्कूल की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने की बात अजिंक्य कलंबे ने कही। स्कूल में कंप्यूटर, वाई-फाई और डिजिटल बोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। आधुनिक शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। वहीं बुधवार को हिंगना तहसील के इंदिरा माता नगर और अमर नगर, निलडोह स्थित जिप स्कूलों का निरीक्षण किया गया। इन स्कूलों की बेहद गंभीर स्थिति सामने आई।

7वीं के विद्यार्थियों को अब तक पांचवीं का परीक्षा परिणाम नहीं मिला है। इतना ही नहीं, कुछ विद्यार्थियों को सामान्य एबीसीडी तक ठीक से नहीं आती, यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई। शिक्षा के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बड़ी मात्रा में धन खर्च किए जाने के बावजूद यह पैसा आखिर कहां जा रहा है, ऐसा सवाल अभियान के माध्यम से उठाया गया।

गणवेश मिला लेकिन जूते नहीं

विद्यार्थियों को गणवेश मिलने के बावजूद उसके साथ आवश्यक जूते नहीं दिए जाने की शिकायत है। शिक्षकों द्वारा बार-बार मांग किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। स्कूल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर ही है। ग्राम पंचायत से सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराने की मांग के बावजूद कर्मचारी नहीं दिया गया।

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वास्तविक स्थिति सामने लाएगा अभियान

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए 'कॉकरोच' ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के माध्यम से ग्रामीण स्कूलों की समस्याओं को उठाने का निर्णय लिया है।

जिले के अधिक से अधिक स्कूलों का निरीक्षण कर वहां की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी।

शिक्षा के साथ सुरक्षित इमारत, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त डेस्क-बेंच, डिजिटल साधन और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है।

प्रशासन ने यदि इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया तो विद्यार्थियों के अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, ऐसी चेतावनी अजिंक्य कलंबे ने दी।

जमीन पर बैठ रहे छात्र

अमर नगर स्कूल की कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। कमरों में केवल दो-चार डेस्क-बेंच हैं। इसके चलते अधिकांश विद्यार्थियों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। कुछ स्थानों पर कई महीनों से वॉशरूम की सफाई नहीं होने की बात भी सामने आई। मध्यान्ह भोजन की स्थिति भी बेहद खराब होने का आरोप लगाया गया।

जिप स्कूलों में चपरासी, लिपिक, सफाई कर्मचारी और प्रबंधन के लिए आवश्यक कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षकों को कई तरह के गैर शैक्षणिक कार्य करने पड़ रहे हैं। अध्यापन के साथ स्कूल का प्रशासनिक कामकाज, सफाई और अन्य जिम्मेदारियां भी शिक्षकों पर हैं।

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