नागपुर ZP स्कूलों पर अस्तित्व का संकट; 75% स्कूलों में 50 से भी कम छात्र, 188 शालाएं बंद होने की कगार पर
Nagpur Zilla Parishad School: नागपुर जिले के 75% जिला परिषद स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थी हैं। 188 स्कूलों में सिर्फ 1 से 10 छात्र पढ़ रहे हैं, जिससे कई स्कूलों के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, जिला परिषद स्कूल,प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: एआई फोटो)
Nagpur Zilla Parishad Schools Rural Education: नागपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में जिला परिषद के स्कूल्स निजी स्कूलों से स्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। शालाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर डिजिटल शालाएं, एआई लैब, मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, मुफ्त यूनिफार्म आदि सहित विविध सुविधाएं तक दी जा रही हैं। बावजूद इसके जेडपी के स्कूल अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जिले की 75 फीसदी जेडपी शालाएं ऐसी हैं जहां 50 से भी कम बच्चे हैं। 188 तो ऐसी हैं जहां 1 से 10 तक विद्यार्थी ही हैं। ऐसी शालाएं बंद होने की कगार पर हैं। इस गंभीर स्थिति की चिंता न ही विभाग को है और न ही सरकार को।
विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की बजाय प्रशासन शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ाने में ही व्यस्त है। इसका परिणाम यह हुआ है कि जिले के 1,509 में से 1,137 स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से भी कम रह गई है। इसके लिए शिक्षा विभाग की निष्क्रय, दिशाहीन और असफल कार्यप्रणाली को जिम्मेदार माना जा रहा है।
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हर वर्ष कम हो रही संख्या
जिला परिषद की शालाओं में हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, 188 स्कूलों में केवल 1 से 10 छात्र, 332 स्कूलों में 11 से 20 छात्र, 310 स्कूलों में 21 से 30 छात्र, 182 स्कूलों में 31 से 40 छात्र, जबकि 125 स्कूलों में 41 से 50 छात्र हैं। केवल 372 स्कूलों में ही विद्यार्थियों की संख्या 50 से अधिक है।
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यानी जिले के लगभग हर 4 में से 4 स्कूल छात्र संख्या घटने के कारण वीरान होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। यह स्थिति अचानक नहीं बनी है। वर्षों से चली आ रही गलत नीतियां, योजनाबद्ध विकास का अभाव, ग्रामीण शिक्षा सुविधाओं की उपेक्षा तथा शिक्षकों को जनगणना, चुनाव, सर्वेक्षण और विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी भरने जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगातार लगाए जाने का परिणाम बताया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि कक्षा में विद्यार्थियों को पढ़ाने की बजाय उन्हें कागजी कार्यों में उलझा दिया गया है, जिससे जिला परिषद स्कूलों की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
स्कूलों के विलय व पदों में कटौती
- चिंताजनक यह है कि छात्र संख्या घटने के मूल कारण को जानने की बजाय प्रशासन स्कूलों के विलय, शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित करना और पदों में कटौती करने में लगा है।
- इसकी कीमत शिक्षकों और ग्रामीण विद्यार्थियों को चुकानी पड़ रही है। शिक्षा को विकास की नींव माना जाता है लेकिन ग्रामीण भागों में यह नींव कमजोर होती जा रही है।
- 1 से 10 विद्यार्थी संख्या वाली शालाओं को बंद करने या अन्य शालाओं में विलय करने का काम ही किया जा रहा है।
जिला परिषद की शालाएं व विद्यार्थी संख्या
| छात्र संख्या | स्कूलों की संख्या |
|---|---|
| 1 से 10 छात्र | 188 |
| 11 से 20 छात्र | 332 |
| 21 से 30 छात्र | 310 |
| 31 से 40 छात्र | 182 |
| 41 से 50 छात्र | 125 |
| 50 से अधिक छात्र | 372 |
| कुल | 1,509 स्कूल |
