किसान ने मांगी DNA जांच: रेलवे प्रोजेक्ट व लाल चंदन का अनोखा विवाद, 100 साल पुराने पेड़ के मूल्यांकन को चुनौती

Nagpur Red Sanders Tree: यवतमाल के एक किसान ने कथित रक्तचंदन के पेड़ के मूल्यांकन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में वैज्ञानिक जांच की मांग की गई है।
Farmer seeks DNA test: A unique dispute involving a railway project and red sandalwood; valuation of a 100-year-old tree challenged.
रक्तचंदन पेड़, यवतमाल किसान, डीएनए जांच,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Red Sanders Tree Revaluation: नागपुर जिले में एक कथित रक्तचंदन (लाल चंदन) के पेड़ के मूल्यांकन को लेकर चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। यवतमाल के किसान पंजाब केशव शिंदे ने वन विभाग द्वारा किए गए पेड़ के मूल्यांकन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। इस याचिका में पेड़ का वैज्ञानिक पुनर्मूल्यांकन, डीएनए विश्लेषण और एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के माध्यम से जांच कराने की मांग की है।

किसान पंजाब शिंदे के पिता की 2.29 हेक्टेयर जमीन को वर्धा-यवतमाल-पुसद-नांदेड रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया था। शिंदे परिवार को जमीन और कुएं का मुआवजा तो दे दिया गया, लेकिन उनकी जमीन पर मौजूद 100 साल से अधिक पुराने बताए जा रहे रक्तचंदन के पेड़ का कोई मुआवजा नहीं दिया गया था। इस संदर्भ में पहले दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने रेल मंत्रालय को 1 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था, जिसमें से 50 लाख रुपये शिंदे परिवार को देने की अनुमति भी दी गई थी।

रेलवे का दावा, संबंधित पेड़ रक्तचंदन का नहीं

मामले में विवाद तब और बढ़ गया जब रेलवे प्रशासन ने यह दावा किया कि संबंधित पेड़ रक्तचंदन का है ही नहीं, रेलवे के इस दावे के बाद शिंदे ने नई याचिका दायर कर पेड़ की असली प्रजाति और उसका सही मूल्य तय करने के लिए एक स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग की है। सोमवार को याचिका पर सुनवाई के बाद न्या. अनिल किलोर और न्या. राज वाकोडे ने रेलवे को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा, साथ ही शिंदे से यह भी पूछा कि रेलवे द्वारा दिए गए 50 लाख रुपये वापस करने को लेकर उनका क्या रुख है। रेलवे की ओर से वकील नीरजा दुबे ने अपना पक्ष रखा।

वन विभाग के मूल्यांकन पर गंभीर आपत्तियां

याचिकाकर्ता ने वन विभाग की मूल्यांकन प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। दरअसल, वन विभाग ने इस पेड़ का मूल्यांकन मात्र 10,089 रुपये किया था, जिसे याचिका में मनमाना, अपर्याप्त और कानूनी मानदंडों के खिलाफ बताया गया है। शिंदे की मांग है कि जब तक निष्पक्ष और वैज्ञानिक रूप से पेड़ का पुनर्मूल्यांकन नहीं हो जाता, तब तक वन विभाग की इस रिपोर्ट पर कोई फैसला न लिया जाए।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि 'भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद' के 2012 के दिशानिर्देशों के अनुसार वनीकरण और लकड़ी मूल्यांकन विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। यह समिति पेड़ की उम्र, उसका घेरा, लकड़ी की कुल मात्रा, गुणवत्ता, ग्रेड और उसके वर्तमान बाजार मूल्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करे।

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