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महाराष्ट्र के जलसम्पदा विभाग ने स्थानीय निकायों को 10 प्रतिशत पानी कटौती के निर्देश दिए हैं।
नागपुर मनपा ने शहर के सभी 10 जोनों में 161 कार वॉशिंग सेंटरों की जांच की।
लक्ष्मीनगर जोन में 12 सेंटरों की जांच में 7 जगह कुएं और 5 जगह बोरवेल के पानी का इस्तेमाल मिला।
हनुमाननगर जोन में 17 सेंटरों पर कुएं के पानी का इस्तेमाल पाया गया; अन्य सेंटरों पर बोरवेल के पानी के उपयोग की जानकारी दी गई।
Nagpur Municipal Corporation Action: महाराष्ट्र राज्य सरकार के जलसम्पदा विभाग की ओर से राज्य के तमाम स्थानीय निकायों को चेतावनी देते हुए 10 प्रतिशत की पानी कटौती करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
निर्देशों के बावजूद भले ही महानगरपालिका पानी कटौती होने से कतरा रही ही, किंतु कच्चा पानी ही नहीं मिलने की सूरत में लोगों को पेयजल कहां से उपलब्ध होगा, इसे लेकर मनपा के पास कोई प्लान नहीं है। बहरहाल भविष्य के इस जलसंकट से निपटने के लिए अब मनपा की ओर से तरकीबें ढूंढी जा रही है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां-जहां पानी का व्यावसायिक उपयोग होने की जानकारी है, वहां की जांच शुरू हो चुकी है। इसके पूर्व ही सीमेंट रोड और अधिक पानी की आवश्यकता वाले प्रकल्पों पर फिलहाल अस्थायी रोक लगी हुई है, मनपा प्रशासन ने पानी का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई शुरू की है और सिटी के सभी 10 जोनों में 161 कार वॉशिंग सेंटरों की जांच की गई।
लक्ष्मीनगर जोन में 12 कार वॉशिंग सेंटरों की जांच की गई। इनमें 7 स्थानों पर कुएं तथा 5 स्थानों पर बोरवेल के पानी का उपयोग होता पाया गया।
धरमपेठ जोन में कुल 26 कार वॉशिंग सेंटरों की जांच की गई। इनमें 4 वॉशिंग सेंटरों के मालिक अवैध रूप से नल के पानी का उपयोग वाहन धोने के लिए करते पाए गए,
हनुमाननगर जोन में 17 स्थानों पर कुएं के पानी का उपयोग होते तथा शेष स्थानों पर बोरवेल के पानी का उपयोग वाहन धोने के लिए किए जाने का पता चला।
इनमें कार और अन्य वाहनों को धोने के लिए कुओं का पानी, बोरवेल तथा मनपा द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले पौने के पानी का उपयोग इटनकर ने कुछ दिन पहले वसिष्ठ अधिकारियों की बैटकर बैठक लेकर संभावित पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए उपाययोजनाएं करने के निर्देश दिए थे।
इसमें कार वॉशिग सेंटरों और स्विमिंग पूल में हो रही पानी की आपूर्ति की जांच करने के निर्देश दिए गए थे, इसके अनुसार शहर के 10 जीनों में उपद्रव शोध पथक ने सख्त कार्रवाई की की अधिकांश शकार वॉशिंग सेंटरों में कुएं या बोरवेल के पानी का उपयोग होते पाया गया। कुछ कार वॉशिंग सेंटरों के मालिक इसके लिए पीने के पानी का उपयोग करते पाए गए।