महाराष्ट्र के विदर्भ में मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, 3 महीने में 22% बारिश कम; पानी का संकट मंडराया

Maharashtra Drought Crisis: विदर्भ में अगस्त के दौरान 58% कम बारिश से सूखे का संकट गहरा गया है। 1 जून से 31 अगस्त के बीच 22% घाटे के कारण फसलें सूख रही हैं और पानी की किल्लत की आशंका है।
Concerns rise in Vidarbha due to erratic monsoon; 22% rainfall deficit over three months
महाराष्ट्र किसान संकट सूखा, सोर्स- सोशल मीडिया
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Maharashtra Vidarbha Drought Crisis: विदर्भ क्षेत्र में इस वर्ष मानसून की गंभीर बेरुखी के कारण सूखे का संकट तेजी से गहराने लगा है। 1 जून से 31 अगस्त के बीच दर्ज किए गए बारिश के आधिकारिक आंकड़े एक चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

मानसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने यानी अगस्त में बारिश की भारी कमी के कारण खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसके साथ ही आगामी महीनों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पीने के पानी की भीषण किल्लत की आशंका प्रबल हो गई है।

फसलों को भारी नुकसान

अगस्त में बारिश न होने से कयास, सोयाबीन, तुअर और धान जैसी मुख्य फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई है। दाने भरने की अवस्था में पानी न मिलने से उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान है।

पीने के पानी की समस्याः बांधों, तालाबों और भूजल स्तर में सुधार न होने के कारण आने वाले महीनों में विदर्भ के ग्रामीण और शहरी इलाकों में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

1 जून से 31 अगस्त तक 22% का कुल घाटा

शुरुआती महीनों से ही बारिश की असमानता के कारण 1 जून से 31 अगस्त के कुल आंकड़ों में विदर्भ के सभी 11 जिले बारिश की कमी (डेफिसिट) का सामना कर रहे है। इस तीन महीने की अवधि में औसतन 781.8 मिमी बारिश की तुलना में केवल 607।1 मिमी पानी बरसा है, जो औसतन 22% की कमी को दर्शाता है।

खेती पर मंडराया संकट : 58% की भारी गिरावट

मानसून सीजन के मध्य में जब जलाशयों को भरने और फसलों के विकास के लिए सबसे अधिक बारिश की आवश्यकता होती है, तभी मानसून पूरी तरह पस्त हो गया। 1 अगस्त से 31 अगस्त के दौरान विदर्भ सबडिविजन में औसतन 297.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तव में केवल 125.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 58% कम है।

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