

Nagpur Urban Haat Handloom Market: महाराष्ट्र सरकार ने 10 मार्च 2025 को अपने बजट में नागपुर में 'अर्बन हाट' स्थापित करने की घोषणा कर शहर को पहला स्थायी हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट मार्केट देने का वादा किया था। इसके बाद महाराष्ट्र राज्य हैंडलूम महामंडल ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा और उसे मंजूरी भी मिल गई लेकिन घोषणा के 15 महीने बाद भी यह महत्वाकांक्षी परियोजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है।
वजह है केंद्र सरकार की मंजूरी का अब तक नहीं मिलना, इसलिए नागपुर का 'अर्बन हाट' प्रोजेक्ट सरकार की फाइलों में ही अटका हुआ है। उधर, वस्त्रोद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि भले ही राज्य सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है लेकिन केंद्र की उदासीनता पर सरकार को सक्रियता दिखानी होगी।
ऐसा प्रतीत हो रहा है राज्य सरकार भी इसे लेकर गंभीर नहीं है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 'अर्बन हाट' विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। इस योजना के तहत नागपुर में उमरेड रोड स्थित महाराष्ट्र राज्य हैंडलूम महामंडल की 2 एकड़ भूमि पर करीब 80 आधुनिक स्टॉल विकसित किए जाने हैं जहां देशभर के बुनकर और हस्तशिल्प कलाकार अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे।
इससे स्थायी मार्केट के बनने से नागपुर में देशभर के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे। यह नागपुर का पहला स्थायी हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट मार्केट होगा लेकिन जिस परियोजना को राज्य सरकार ने मंजूरी देकर केंद्र को भेज दिया था, वह अब केंद्रीय स्वीकृति की प्रतीक्षा में फाइलों में कैद होकर रह गई है।
सूत्रों के अनुसार परियोजना का वित्तीय ढांचा ही केंद्रीय मंजूरी पर निर्भर है। इस योजना में 80 प्रतिशत निधि केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाना है। इस लिहाज से केंद्र सरकार की मंजूरी पर ही सबकुछ निर्भर है लेकिन केंद्र सरकार की स्वीकृति के अभाव में न निधि जारी हो पा रही है और न ही निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ पा रही है।
'अर्बन हाट' के माध्यम से देशभर के बुनकरों, हस्तशिल्प कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का मंच मिलता है। यह केवल बाजार नहीं बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति, रोजगार को बढ़ावा देने वाला केंद्र होता है।
नागपुर में प्रस्तावित अर्बन हाट शुरू होने पर यहां हैंडलूम वस्त्र, हस्तशिल्प उत्पाद, पारंपरिक कलाकृतियां, बांस एवं लकड़ी के उत्पाद, जनजातीय हस्तकला और क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों की बिक्री हो सकेगी। इससे स्थानीय कारीगरों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
'अर्बन हाट' प्रोजेक्ट को राज्य सरकार से पिछले वर्ष डी मंजूरी मिल गई है। फिलहाल केंद्र सरकार से मंजूरी मिलना बाकी है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, केंद्र सरकार के पास मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
-महाराष्ट्र राज्य हैंडलूम महामंडल, सह प्रबंध निदेशक, जीजी गजभिये
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से रियाज अहमद की रिपोर्ट