नागपुर में दोहरी मार से थमे ट्रकों के पहिये: डीजल की बढ़ी कीमतों से ट्रांसपोर्ट उद्योग बेहाल

Nagpur Transport Crisis: डीजल महंगा होने और कई रूटों पर ईंधन संकट के कारण नागपुर में ट्रक भाड़ा बढ़ सकता है। ट्रांसपोर्टर लागत बढ़ने और ट्रक संचालन प्रभावित होने से परेशान हैं।
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नागपुर ट्रांसपोर्ट संकट,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Transport Crisis Diesel Price Hike: नागपुर आने वाले दिनों में ट्रक भाड़े में अच्छी खासी वृद्धि देखने को मिल सकती है। डीजल के दामों में वृद्धि के बाद ट्रांसपोर्टर उद्योग हिल गया है। अब तक भाड़े में वृद्धि तो नहीं हुई है लेकिन दबाव काफी महसूस किया जा रहा है। विदर्भ ट्रक एंड ट्रांसपोर्टर ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कई लोग अपना ट्रक नहीं चला पा रहे हैं। दूसरा बड़ा संकट यह भी है कि कई रूटों पर डीजल नहीं मिल रहा है जिसके कारण भी ट्रक थम गए हैं।

लंबी दूरी के भाड़े में हजारों का अंतर

एसोसिएशन के सचिव दिलीप सिंह तुली ने कहा कि भाड़े में वृद्धि को लेकर 30 मई को बैठक बुलाई गई है। बैठक में सभी बड़े ट्रक ऑपरेटर शामिल होंगे, उन्होंने कहा कि डीजल के दामों में जितनी वृद्धि हुई है उससे यही लगता है कि ट्रक भाड़े में प्रति किलोमीटर 5 से 7 रुपये की वृद्धि करनी होगी। वर्तमान में ट्रक 25 रुपये किलोमीटर के हिसाब से माल होते हैं, आने वाले दिनों में यह 30-32 रुपये प्रति किलोमीटर हो जाएगा। स्पष्ट है कि लंबी दूरी के भाड़े में हजारों रुपये का अंतर आएगा। संगठन के अध्यक्ष अमृतपाल अलग का कहा है कि कई रूट पर माल का भारी शार्टेज है। इसके कारण पहले से ही ट्रक खड़े पड़े हैं, बैंकों को कर्ज चुकाना भी महंगा सौदा हो गया है। एक अनुमान के अनुसार 20-25 फीसदी ट्रक खड़े पड़े हैं क्योंकि माल की तंगी है। उनका कहना है कि डीजल के शाटेंज ने भी हालत को बिगाड़ दिए हैं। इसके अलावा अब दर वृद्धि कमर तोड़ने लगी है।

इन सेक्टरों पर पड़ेगा असर

फल और सब्जियां ट्रकों और अन्य वाहनों का भाड़ा बढ़ने से खेत से बाजार तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ, ताजी सब्जिया, फल महंगे होंगे। किराना और दूध पैकेट बंद सामान, दाले, तेल और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की दुलाई महंगी होने के कारण कीमतों में वृद्धि होगी।

निर्माण सामग्री सीमेंट, लोहा, इंट-भट्टों को चलाने और ट्रकों से सामग्री मंगाने की लागत बढ़ गई है।

दवाइयां और मेडिकल उपकरण दवाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए कोल्ड चेन और परिवहन पर अधिक खर्च होता है जिससे वे महंगी हो जाती है।

कृषि लागत ट्रैक्टर से जुताई, हार्वेस्टर के इस्तेमाल और सिंचाई के लिए डीजल का उपयोग होता है जिससे खेती करना और फसल की कटाई महंगी हो गई है।

टैक्सी और बस का सफर सार्वजनिक परिवहन (बसे) और निजी टैक्सी संचालकों का परिचालन खर्च बढ़ने से यात्रियों को अधिका किराया देना पड़ता है।

500-1,000 ट्रकों की लोडिंग

तुली ने बताया कि नागपुर में मौटे तौर पर रोजाना 500-1,000 ट्रक माल की लोडिंग होती है। 5,000 से अधिक ट्रक रोजाना ट्रांजिट होते हैं। अधिकांश पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उनका कहना है कि 30 की बैठक के बाद हमें उम्मीद है कि 1 जून से किराया बढ़ना तय है। इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों के पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है।

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