

इतवारी, वर्धमाननगर और कलमना के व्यापारियों ने कुछ लोगों पर दुकानों और गोदामों में पहुंचकर दबाव बनाने के आरोप लगाए।
कारोबारियों का दावा है कि माल और दस्तावेजों की जांच के नाम पर उन्हें परेशान किया जाता है।
व्यापारियों का कहना है कि माल जब्त होने और लैब रिपोर्ट आने में समय लगने से कारोबार प्रभावित होता है।
Nagpur FDA Police Nexus: नागपुर जिले में इतवारी, वर्धमाननगर, कलमना जैसे क्षेत्रों में कारोबार करने वाले व्यापारी इन दिनों खासे परेशान हैं। पर्व-त्योहार के दिनों में भी उन्हें कारोबार करने नहीं दिया जा रहा है। इसके लिए कोई और नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के कुछ छुटभैया नेता ही जिम्मेदार बताये जा रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि नेता गोदाम, दुकान में पहुंच जाते हैं और फिर रील बनाने के नाम पर 'ब्लैकमेल' करते हैं। अनाज, किराना, तेल कारोबार से जुड़े व्यापारियों को भी टारगेट में रखा जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इन नेताओं के संपर्क कुछ एफडीए और पुलिस के लोगों से हैं।
जैसे ही नेताओं पर व्यापारी दबाव बनाते हैं, वे फोन कर इन अधिकारियों को बुला लेते हैं और फिर व्यापारियों को 'झुकना' पड़ जाता है। झूठे मामले बनाकर व्यापारियों को परेशान करने का यह नया सिलसिला शुरू हो गया है। व्यापारियों ने बताया कि छुटभैया नेता दिनभर गोदाम, ट्रांसपोर्ट कार्यालय और दुकानों के आसपास चक्कर लगाते रहते हैं।
जैसे ही कोई ट्रक माल लेकर आता है, वे पहुंच जाते हैं। व्यापारियों को माल दिखाने, कागजात दिखाने की मांग करने लगते हैं, ऐसा लगता है मानों वे राजनीतिक पार्टी के कार्यकता नहीं बल्कि एफडीए और पुलिस विभाग के अधिकारी या कर्मचारी हैं।
ट्रकों, दुकानों और गोदामों का रील बनाने लग जाते हैं और फिर धमकी देकर पैसों की मांग करते हैं। मना करने पर तुरंत इन विभागों के अधिकारियों को बुला लिया जाता है। अधिकारी भी उनके इशारों में ऐसा काम करते हैं मानों वे (नेता) उनके ऑस हैं।
व्यापारियों का कहना है कि नेताओं से जैसे ही बहसबाजी शुरू होती है है ये वैसे ही अधिकारी, कर्मचारी पहुंच जाते हैं। यह स्पष्ट आभास होता है कि नेताओं से मिलीभगत रहती है और पहले से ये तथ रहता है कि किस प्रतिष्ठान में कब पहुंचना है, व्यापारियों ने बताया कि इस प्रकार का खखेल बड़े पैमाने पर हो रहा है।
इसकी शिकायत कई बार पुलिस आयुक्त और एफडीए आयुक्त से भी की गई है और स्थानीय अधिकारियों के संबंध में जानकारी दी गई, कुछ समय के लिए मामला दब जाता है लेकिन पुनः इस खेल को शुरू कर दिया जाता है। खासकर त्योहारों के दौरान यह खेल बड़े पैमाने पर चलता है।
किराना, तेल, मसाला, दूध, पनीर, सुपारी जैसे कारोबार से जुड़े व्यापारी इससे बुरी तरह से परेशान हो चुके हैं। उनका कहना है कि नेता और अधिकारियों को हर माल मिलावटी नजर आता है।
जबकि वास्तविकता यह है कि लैब से जब टेस्ट रिपोर्ट आती है तो 75-80 फीसदी मामले में मिलावट नहीं मिलती है। लेकिन इस बीच माल फंस जाता है। व्यापारी रेड से डर जाते हैं क्योंकि उनकी पूंजी अटक जाती है और माल बर्बाद हो जाता है।
वास्तव में देखा जाए तो व्यापारी सिर्फ इसलिए डरते हैं क्योंकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) माल जब्त कर लेता है। बाद में लैब और लैब की रिपोर्ट आने तक माल फंसा रह जाता है, व्यापारी नहीं चाहते हैं कि त्योहार के दौरान उनका करोड़ों का माल जब्त रहे।
इसलिए वे कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। इसी मजबूरी का लाभ राजनेताओं का गठबंधन' उठा लेता है। व्यापारियों में एकजुटता की कमी भी इसके लिए बड़ी जिम्मेदार है क्योंकि कोई भी बार-बार पुलिस और एफडीए के चक्कर में पढ़ना नहीं चाहता।
नागपुर शहर का कारोबारी माहौल अच्छा है। इसे अच्छा बनाये रखने की जिम्मेदारी सभी की है। किसी भी व्यापारिक प्रतिष्ठान को रात-बेरात खुलवाने की परंपरा ठीक नहीं है। यह माहौल खराब करने वाली बात है। इस संबंध में जल्द ही आला अधिकारियों ने प्रतिनिधि मंडल मिलेगा और उचित कदम उठाने के लिए बात करेगा।
स्वप्निल अहिरकर, अध्यक्ष, एनवीसीसी
रात में डेढ़-दो बजे कुछ लोग आसानी से गोदामों, दुकानों में प्रवेश कर जाते हैं। तोड़फोड़ करते हैं। इस प्रकार की प्रवृत्ति शहर के लिए ठीक नहीं है। निश्चित रूप से छोटे-छोटे नेता अपनी पार्टी का नाम धूमिल कर रहे है वहीं व्यापार का माहौल भी खराब कर रहे है। व्यापारी इसका पुरजोर विरोध करेंगे, इस संबंध में पुलिस और एफडीए के अधिकारियों से जल्द मुलाकात की जाएगी और उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत कराया जाएगा। इससे पुलिस-प्रशासन की छवि भी खराब हो रही है। बड़े अधिकारियों को इस पर सीधना होगा कि छोटे-छोटे लोगों के बुलाने पर पुलिस एफडीए अधिकारी रात को प्रतिष्ठान कैसे खुलवा लेते है।
शिव परमार, अध्यक्ष, बीजेपी ट्रांसपोर्ट आधाड़ी