नागपुर. नागपुर विवि से अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के साथ डिप्लोमा कोर्सेज की पढ़ाई कर रहे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है. इसका कारण विवि प्रबंधन द्वारा परीक्षा कराने को लेकर निर्णय में देरी होना है. सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार और विवि प्रबंधन ने परीक्षा के निर्णय को फुटबॉल बना दिया है. दोनों एक दूसरे के पाले में निर्णय रूपी बॉल डाल रहे हैं. जिसका खामियाजा लाखों छात्रों को भोगना पड़ रहा है.
विवि ने पूर्व में एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों पद्धति से परीक्षा कराने का विकल्प था लेकिन ऐन वक्त पर उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने सभी विवि को ऑफलाइन परीक्षाएं कराने के निर्देश दिए. जिसके बाद विवि को अपना नोटिफिकेशन वापस लेना पड़ा.
शिक्षाविदों की मानें तो विवि प्रबंधन को मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिफिकेशन रद्द करने के साथ ही परीक्षाओं का नया टाइम टेबल घोषित करना चाहिए था लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी परीक्षाओं को लेकर कोई स्पष्ट स्थिति नहीं बन पाई है. जिसके कारण अभिभावक और छात्र दोनों की टेंशन बढ़ी हुई हैं. किसी को समझ नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए. इस मामले में विवि प्रबंधन कुछ भी कहने को तैयार नहीं है. बता दें कि पुराने नोटिफिकेशन के अनुसार 2 मई से शुरू होने वाली प्रैक्टिकल परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं.
कॉलेजों और छात्रों ने प्रायोगिक परीक्षा की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन अब छात्रों के सामने सवाल यह है कि वे परीक्षाएं कब देंगे?. परीक्षाओं का परिणाम कब आएगा?. वे आगामी कक्षाओं में कब एडमिशन लेंगे?. ऐसे तमाम तरह के सवाल उनके और अभिभावकों के दिमाग में घूम रहे हैं. कुछ अभिभावक छात्रों के साथ परीक्षा के समय को लेकर विवि प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा है. विवि के इस रुख से कई प्रोफेसर भी नाराज हैं. वे जल्द से जल्द परीक्षाओं की समय सारिणी जारी करने की मांग कर रहे हैं.
चूंकि परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति है इसका असर अगले शैक्षणिक सत्र पर पड़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. समय पर नया सत्र शुरू करने के लिए समय पर परीक्षा होना आवश्यक है. कोरोना ने पहले ही शैक्षणिक सत्र के कार्यक्रम को अस्त-व्यस्त कर दिया जबकि कोरोना की सारी पाबंदियां हटा ली गई हैं. प्रोफेसरों का कहना है कि अगला सत्र नियमित होना चाहिए. चूंकि परीक्षा प्रक्रिया में कम से कम तीन महीने लगते हैं अगर इसमें देरी होती है तो अगले सत्र का समय बढ़ना तय है. जिसे रोका जाना चाहिए.