

नागपुर: विधानसभा चुनाव की आचार संहिता अब किसी भी दिन लगने की संभावना है, ऐसे में अभी तक महाविकास आघाड़ी में जिले की दो सीटें रामटेक व दक्षिण नागपुर को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाने की जानकारी है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए उम्मीदवारी छोड़ने के बाद शिवसेना उद्धव ठाकरे द्वारा गठबंधन धर्म का पालन करने की अपील करते हुए दोनों सीटें उसे देने की अपील की। जिसके चलते कांग्रेसी खेमे में हड़कंप मचा हुआ है।
रामटेक सीट से जिलाध्यक्ष राजेन्द्र मूलक और दक्षिण नागपुर से गिरीश पांडव चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में अगर ये सीटें यूबीटी को जाती हैं तो पार्टी में बगावत हो सकती है। रामटेक सीट पर तो यूबीटी का दावा समझा भी जा सकता है। चर्चा है कि यह सीट उसे ही दी जाएगी। ऐसे में मूलक कामठी सीट से अपनी संभावना तलाशने की कोशिश में है।
मूलक अगर कामठी के लिए जोर लगाते हैं तो यहां पार्टी के जमे हुए स्थानीय नेताओं में नाराजगी का सुर बढ़ेगा। दक्षिण के लिए जिद पर अड़ी यूबीटी के लिए कांग्रेस ने अगर सीट छोड़ी तो यहां भी बगावत हो सकती है। क्योंकि कांग्रेस इस सीट पर बेहद मजबूत स्थिति में है।
कांग्रेस की ओर से दावा किया जा रहा है कि रामटेक में शिवसेना (यूबीटी) के पास जीत खींच कर लाने वाला दमदार उम्मीदवार ही नहीं लेकिन यह तर्क मानने को ठाकरे गुट तैयार नहीं है। इस सीट से कैलास बरबटे, पूर्व सांसद प्रकाश जाधव का नाम चल रहा है। जानकारी के अनुसार, लेकिन मुंबई में यह लाबिंग की जा रही है कि मूलक उन दोनों की अपेक्षा कहीं अधिक मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकते हैं लेकिन ठाकरे के शिवसैनिक पार्टी का अस्तित्व कायम रखने के लिए यह सीट अपने पास रखने पर अड़े हैं।
बीते चुनावों में इस सीट से संयुक्त शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा था। विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे गुट कांग्रेस के साथ महा विकास आघाड़ी में है। गठबंधन में यह तय हुआ है कि मेरिट आधार पर उम्मीदवारी दी जाएगी। कांग्रेस इसी आधार पर अपना दावा ठोक रही है लेकिन ठाकरे गुट इस सीट पर अपने दावे पर अडिग है।
दक्षिण नागपुर की सीट पर बीते चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार गिरीश पांडव भाजपा के मोहन मते से मात्र 4,000 वोटों के अंतर से पीछे रह गए थे। इस चुनाव के लिए उन्होंने तो प्रचार भी शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, ठाकरे गुट से जिला प्रमुख प्रमोद मानमोड़े को काम पर लगने का संदेश दिए जाने की चर्चा है।
वहीं जिला प्रमुख किशोर कुमेरिया भी चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। दीपक कापसे के नाम की भी चर्चा है। कांग्रेस ने अगर पांडव को रिपीट किया तो वे बीजेपी के लिए फिर चुनौती पेश करेंगे यह निश्चित है। अगर उम्मीदवारी नहीं दी गई तो लोकसभा चुनाव की तरह सांगली पैटर्न की संभावना बन रही है।
लोकसभा चुनाव में सांगली सीट के लिए यूबीटी ने अपने मन से ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था जिसके जवाब में कांग्रेस ने निर्दलीय रूप में अपना उम्मीदवार उतारा और वह सीट जीती। विधानसभा चुनाव में दक्षिण नागपुर सीट पर यह पैटर्न नजर आ सकता है क्योंकि कांग्रेस किसी कीमत पर यह सीट बीजेपी से छीनने की रणनीति पर काम कर रही है।