

Nagpur Constitution Square Protest: दिल्ली में छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में राज्यभर में आक्रोश देखने को मिल रहा है। छात्र बेधड़क होकर सड़कों पर उतर रहे हैं। 20 जुलाई को हजारों की संख्या में 'जेन जी' ने संविधान चौक पर प्रदर्शन किया था और बुधवार को एक बार फिर हजारों की संख्या में 'कॉकरोच' एकजुट हुए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, पुलिस कार्रवाई का विरोध और 'इस्तीफा लो-न्याय दो' के नारों के साथ सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। रात 11 बजे तक आंदोलनकारी संविधान चौक पर प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में अचानक भारी तादाद में पुलिस बल मौके पर बुलाया गया।
पहले तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन खुद खत्म करने को कहा। बात नहीं बनी तो पुलिस ने 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया। काफी गहमा-गहमी भी हुई, कुछ आंदोलनकारियों को जबरन खदेड़ा गया और कुछ को सीधे पुलिस वाहन में डालकर हेड क्वार्टर ले जाया गया।
बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों के संविधान चौक पर जमा होने के कारण पहले ही पुलिस बंदोबस्त तैनात कर गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार शाम 7 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी। इसके बाद भी रात तक आंदोलनकारी स्थल से हटने को तैयार नहीं थे।
रात 10:30 बजे सीपी विश्वास नांगरे पाटिल और ज्वाइंट सीपी नवीनचंद्र रेड्डी सहित आला अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। सभी डीसीपी मौके पर मौजूद थे। आंदोलनकारियों को हटाने और डिटेन करने का फैसला लिया गया।
पिछले 25 दिनों से दिल्ली के जतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन चल रहा है। समाजसेवी और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में लिए जाने और 20 जुलाई को 'संसद मार्च के दौरान देशभर से आए छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से छात्रों में भारी गुस्सा है।
इसी का असर नागपुर में भी देखने को मिला। सोशल मीडिया के माध्यम से नागपुर के संविधान चौक पर देखते ही देखते हजारों युवा (कॉकरोच) जमा हो गए। पुलिस को इस भारी भीड़ को संभालना और हटाना मुमकिन नहीं हो पाया।
इस आंदोलन में नागपुर के युवा भी बड़ी संख्या में मौजूद थे, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने अपनी आंखो से पुलिस का लाठीचार्ज देखा और झेला था। अपनी आपबीती साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अब पीछे हटने का समय नहीं है। सरकार तानाशाही के जरिए छात्रों को कुचलने की कोशिश कर रही है। इसलिए सभी को अपने भविष्य के लिए आगे के आंदोलनों में भी डटकर मुकाबला करना चाहिए।