स्पेशल स्टोरी: मैं नागपुर स्टेशन बोल रहा हूं…बुढ़ापे से जवानी की ओर बढ़ती पिछले 100 वर्षों की कहानी
नागपुर रेलवे स्टेशन अपने 100वें वर्ष में पहुंच चुका है। 100 वर्षों में कोई भी जीर्ण-शीर्ण होने की कगार पर पहुंच जाता है। लेकिन नागपुर रेलवे स्टेशन को जवां हो रहा है। अगर वह बोलता तो क्या कहता पढ़िए इस स्पेशल स्टोरी में..
- Written By: अभिषेक सिंह
नागपुर रेलवे स्टेशन (फाइल फोटो)
नवभारत, नागपुर: मेरी स्थापना 15 जनवरी 1925 को ब्रिटिश शासन के तत्कालीन गवर्नर सर फ्रैंक ने की थी। आज करोड़ों का मूल्य रखने वाले मेरे इस आंगन यानी करीब 30 एकड़ की जमीन को खैरागड़ के राजा ने ब्रिटिश सरकार को मात्र 1 रुपए में बेची थी। मेरी इस ऐतिहासिक इमारत के लिए सावनेर से बलुआ पत्थर लाये गये थे। मैं अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका हूं।
अगर मैं यह कहूं कि मैं बूढ़ा होता रहा था लेकिन केन्द्र सरकार और रेलवे मंत्रालय द्वारा पिछले 25 वर्षों में मेरी अहमियत को और अधिक बढ़ाकर एक बार फिर मुझे जवानी की ओर बढ़ा दिया गया है। जल्द ही एक बार फिर मेरे नैननक्श यात्रियों को आकर्षित करेंगे। मेरा जीर्णोद्धार हो रहा है और मैं फिर से जवां हो रहा हूं।।।।
500 करोड़ में हो कायाकल्प
यूं तो मेरा इतिहास 1864 से शुरू होता है लेकिन वर्ष 2000 से अचानक मेरे प्लेटफॉर्म से रवाना होने वाली ट्रेनें बढ़ा दी गईं। पिछले 100 वर्षों में मेरे आंगन में छापे वाली आरक्षण टिकट से लेकर अब कम्प्यूटरीकृत टिकट काउंटर शुरू हो गया है। किसी समय मात्र 1 रुपये में मिली जमीन पर आज 489 करोड़ की लागत से विश्व स्तरीय स्टेशन तैयार हो रहा है।
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मुझे इस बात की भी बहुत खुशी है कि मैं देश के पहले ऐसे शहर में स्थापित हूं जहां 2-2 वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाये जा रहे हैं। जी हां, मेरे साथ मेरे छोटे भाई अजनी स्टेशन को भी करीब 300 करोड़ की लागत से नये रूप में संवारा जा रहा है। पिछले 25 वर्षों में अपने आंगन में कई बदलाव देखे। विशाल पार्किंग और उसके बीच भारतीय रेल के इतिहास का गवाह बुलंद इंजन। पश्चिम भाग के साथ पूर्वी भाग में भी टिकट काउंटर और विभिन्न सुविधाएं।
अब 8 प्लेटफॉर्म, कार टू कोच की पहली सुविधा
- पिछले 25 वर्षों में मेरे विस्तार को कभी रोका नहीं गया। मेरे पास 7 ही प्लेटफॉर्म थे लेकिन भविष्य में ट्रेनों और यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पूर्वी भाग में 8वां प्लेटफॉर्म तैयार किया गया।
- इसके बनते ही मेरा नाम और अधिक रोशन हो गया क्योंकि यह देश का पहला कार टू कोच सर्विस वाला एक स्पेशल प्लेटफॉर्म है जहां यात्री अपनी कार से सीधे प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकते हैं।
- यहां आये यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए प्रीपेड ऑटो बूथ, 268 हाई डेफिनेशन सीसीटीवी कैमरों की शानदार आरपीएफ यूनिट, रेलवे सुरक्षा बल का 150 से अधिक सुरक्षाकर्मियों का स्टाफ, लोहमार्ग पुलिस में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की नियुक्ति से रेल संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा पहले के मुकाबले पुख्ता हुई।
- हालांकि यात्री संख्या बढ़ने के साथ अपराध भी बढ़े लेकिन अब अधिकांश अपराधों में आरोपी पकड़े भी जाने लगे हैं।
जब विदर्भ ने सिटी को मुंबई से जोड़ा
- मैं उस आंदोलन का भी गवाह रहा हूं जिसमें शहरवासियों ने नागपुर शहर को सीधे मुंबई से जोड़ने के लिए अपनी ट्रेन की मांग की।
- आंदोलन को विस्तार होता देख रेल मंत्रालय भी झुक गया और ट्रेन 12106/05 नागपुर-मुंबई-नागपुर विदर्भ एक्सप्रेस की सौगात मिली।
- यह पहली ट्रेन थी जिसने शहरवासियों को थोड़ी आसानी से राज्य की राजधानी मुंबई से जोड़ा। इसके बाद सेवाग्राम के अलावा दुरांतो जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी मिलीं।
- पिछले 25 वर्षों में मेरे प्लेटफॉर्म से शुरू होकर देश के विभिन्न शहरों को जोड़ने वाली ट्रेनों की बाढ़ सी आ गई।
- आज यहां से मुंबई और पुणे के अलावा अहमदाबाद, जयपुर, जबलपुर, शहडोल, सिकंदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें परिचालित हो रही हैं।
- हालांकि हावड़ा, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे महानगरों के लिए सीधी ट्रेन की जरूरत है। मुझे पूरा विश्वास है कि वर्ष 2025 में मेरी यह इच्छा भी पूरी होगी।
पहली बार किसी PM ने रखा कदम
- पिछले 25 वर्षों में एक विशेष घटनाक्रम का भी गवाह बना जब 11 दिसंबर 2022 को नागपुर-बिलासपुर वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरे आंगन में पैर रखा।
- मुझे पहली बार देश के किसी प्रधानमंत्री के स्वागत का अवसर मिला। गर्व की बात है कि देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन (छठवां संस्करण) बिलासपुर वंदे भारत के तौर पर मेरे आंगन से रवाना की गई।
- इसके बाद इस वर्ष सितंबर में नागपुर-सिकंदराबाद-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस का भी उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन किया।
- इससे पहले शहरवासियों की मांग पर इंदौर-भोपाल-इंदौर वंदे भारत को नागपुर तक विस्तार देकर मुझे महाकाल की नगरी उज्जैन और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से जोड़ा गया।
- मुझे पूरा विश्वास है कि मेरा रिडेवलपमेंट पूरा होते ही मेरे नये, आधुनिक और विश्व स्तरीय पहचान का उद्घाटन भी पीएम मोदी ही करेंगे।
