

नागास्त्र-2 की डिलीवरी पूरी, भारतीय सेना में तैनाती के लिए तैयार।
25 किमी से अधिक रेंज और 650 मिमी तक आर्मर भेदने की क्षमता।
ईडब्ल्यू माहौल में परीक्षण सफल; एंटी-जैमिंग और ऑटोनॉमस गाइडेंस जैसी खूबियां।
Nagastra-2 Loitering Munition: भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को मजबूती मिली है। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) क्षमता वाली नागास्त्र-2 लोइटरिंग म्यूनिशन प्रणाली की डिलीवरी पूरी कर ली है। कंपनी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परीक्षण सफल रहने के बाद यह प्रणाली सेना में तैनाती के लिए तैयार है।
नागास्त्र-2 को आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसमें एंटी-जैमिंग, एंटी-स्पूफिंग और मल्टी-मोड कम्युनिकेशन जैसी विशेषताएं दी गई हैं। कंपनी के मुताबिक, इसका विजन-बेस्ड ट्रैकिंग और ऑटोनॉमस गाइडेंस सिस्टम जीपीएस सिग्नल बाधित होने की स्थिति में भी लक्ष्य को ट्रैक करने में मदद करता है।
नागास्त्र-2 की परिचालन सीमा 25 किलोमीटर से अधिक बताई गई है। इसका इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड दिन और रात दोनों समय काम करने वाले डुअल सेंसर से लैस है। यह प्रणाली बख्तरबंद वाहनों समेत विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए तैयार की गई है।
कंपनी के अनुसार, नागास्त्र-2 में स्वदेशी रूप से विकसित टैंडम एंटी-टैंक वारहेड लगाया गया है। यह एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर (ERA) को निष्प्रभावी करने और 650 मिमी तक के रोल्ड होमोजेनियस आर्मर (RHA) को भेदने में सक्षम है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता परिस्थितियों और परीक्षण मानकों पर निर्भर करती है।
अगस्त 2026 में राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में नागास्त्र-2 के तकनीकी परीक्षण किए गए थे। कंपनी के मुताबिक, भारतीय सेना के बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स की मौजूदगी में प्रणाली के परिचालन मानकों और ईसीसीएम प्रदर्शन का परीक्षण सफल रहा। इसके बाद डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी की गई।
नागास्त्र-2 की डिलीवरी से भारतीय रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्नत संचार, ट्रैकिंग और मार्गदर्शन क्षमताओं से लैस यह प्रणाली आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।