नागपुर स्नातक चुनाव: बागी शांत होने के बाद भी बीजेपी-कांग्रेस में भीतरघात का डर, कार्यकर्ताओं में रोष

BJP Rebel Anil Sole: नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में नाम वापसी के बाद भी दोनों प्रमुख दलों में असंतोष जारी है। BJP के भीतर बागी बगावत के बाद शांत हुए, पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बरकरार है।
Nagpur Graduate MLC Election
बीजेपी-कांग्रेससोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार प्रचार में जुटे हैं।

  • BJP के पूर्व विधायक अनिल सोले ने उम्मीदवारी तय करने की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई थी और बाद में नाम वापस लेने के घटनाक्रम की चर्चा रही।

  • CM से मुलाकात के बाद सोले के सुधाकर कोहले के समर्थन में काम करने की बात कही गई है।

  • कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के समर्थन में हुए सम्मेलन में उत्तर नागपुर के कुछ नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा में रही।

Nagpur Graduate MLC Election: नागपुर संभाग स्नातक चुनाव क्षेत्र के चुनाव में नामांकन दाखिल करने और नाम वापसी की तिथि तक चले घटनाक्रम और उसके बाद बीजेपी के बागी द्वारा मैदान से हटने के बाद भी नाराजगी के सुर बरकरार हैं। कांग्रेस में आपसी गुटबाजी की तस्वीरें अभी भी देखने को मिल रही हैं।

भले ही दोनों चिरप्रतिद्वंद्वी पार्टियों के अधिकृत उम्मीदवार अब जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं लेकिन ऊंट किस करवट बैठेगा, यह भांपना राजनीति के जानकारों के लिए भी कठिन हो रहा है। कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के समर्थन में हाल ही में राज्य प्रभारी सिरिवेल्ला की उपस्थिति में हुए।

सम्मेलन में उत्तर नागपुर के नेता नदारद नजर आए। हालांकि सारे उपस्थित नेताओं ने एकजुटता पर जोर देते हुए कार्यकर्ताओं से वंजारी के लिए कार्य करने की अपील की लेकिन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अपने संबोधन में गुटबाजी की ओर भी इशारा किया।बीजेपी में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता अपने ही नेताओं से नाराज हैं।

नेता माने लेकिन कार्यकर्ताओं में रोष

बीजेपी में पूर्व विधायक अनिल सोले जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता जो कभी पार्टीलाइन से बाहर नहीं गये थे, उन्होंने उम्मीदवारी तय करने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बगावत कर दी थी। नामांकन वापसी की तिथि के दिन जब उन्होंने नाम वापस नहीं लिया तो खुद सीएम को उनके घर पहुंचना पड़ा।

उन्होंने सीएम के सामने भी अपनी भड़ास निकाली। कहा जा रहा है कि भले ही वे मान गये हों और उन्होंने सुधाकर कोहले के समर्थन में कार्य करने की बात कही हो लेकिन उनका चेहरा व बाडीलैंगवेज कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे थे।

उनके समर्थक तो अभी भी बुरी तरह भड़के हुए हैं। कहा जा रहा है कि वर्ष 2020 के चुनाव में जिस तरह संदीप जोशी की हार हुई कहीं वही परिणाम इस बार भी न दोहरा जाए। नाना पटोले ने दावा किया है कि ग्रामीण के साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी रोष है और वे अपनी भावनाएं भी व्यक्त कर रहे हैं।

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कांग्रेस में कम नहीं झोल

शहर व जिला कांग्रेस की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। पूर्व शहराध्यक्ष विकास ठाकरे ने प्रफुल गुडधे के अध्यक्ष बनने के बाद हुए समारोह में खुलेआम यह खुलासा किया था कि कैसे उन्हें विधानसभा और लोकसभा चुनाव में हराने के लिए पार्टी के ही कुछ नेता जुटे हुए थे।

उन्होंने गुड्चे को ऐसे लोगों से सावधान रहने की हिदायत भी दी थी। फिलहाल शहर व जिला कांग्रेस नेता स्नातक चुनाव में वंजारी को जिताने के लिए एकजुटता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कौन कितना साथ देता है, यह परिणाम ही बताएगा, सम्मेलन में उत्तर नागपुर के नेता की दूरी चर्चा का विषय चनी हुई है। कांग्रेस में भी कम झोल नहीं है और वंजारी को विविध दलों के उम्मीदवारों के साथ भीतरी विभीषणों को पहचान कर चुनाव लड़ना होगा।

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