सेहत के नाम पर धोखा? नागपुर में RO वाटर के नाम पर खेल? कैन में बिक रहा सिर्फ नल का पानी

Nagpur RO Water Can News: नागपुर में आरओ वाटर के नाम पर बिक रहे कैन के पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। कई सप्लायरों के पास आरओ प्लांट तक नहीं होने के आरोप हैं।
Deception in the Name of Health? A Scam Involving RO Water in Nagpur? Just Tap Water Being Sold in Cans.
आरओ वाटर, कैन पानी, नागपुर, पेयजल गुणवत्ता, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur Water Can Supply News: नागपुर ऑरेंज सिटी में आरओ वाटर के नाम पर करोड़ों का करोबार हो रहा है। शादी-ब्याह सहित विविध तरह के छोटे-बड़े समारोह के साथ दुकानों, ऑफिसेस और घरों में सप्लाई होने वाले कैन में भरे पानी को लोग सेहतमंद समझकर पी रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें पता नहीं कि आरओ वाटर के नाम पर सिर्फ नल का पानी ही बेचा जा रहा है। इसकी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। कैन में पानी बेचने वालों में से 70 प्रश से अधिक लोगों के पास आरओ प्लांट है ही नहीं। इनके पानी की कोई जांच का पैमाना भी नहीं है और पानी की कभी जांच भी नहीं की जाती।

कइयों के पास नहीं है ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस बिना सील बंद पानी की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी आरेजसिटी में पानी के धंधेबाज प्रतिदिन कैन और वाटर कूलर के माध्यम से हजारों लीटर पानी की सप्लाई कर रहे है।

कैन पर न तो उसे तैयार करने की तिथि होती है, न ही उसके उपयोग की, बैच नंबर और लाइसेंस नंबर भी अंकित नहीं होता है। इस तरह के कैन को खरीदकर प्यास बुझाने वाले लोगों का विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है। अवैध तरीके से जो भी प्लांट संचालित हो रहे हैं, उनमें से किसी के पास भी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस नहीं है। जबकि मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए यह लाइसेंस होना सबसे जरूरी होता है।

अधिक टीडीएस की मात्रा हेल्थ के लिए खतरनाक

जानकारी के अनुसार जो आरओ प्लांट रजिस्टर्ड हैं, वे ही वाटर बेचने का अधिकार रखते हैं, लेकिन इन दिनों यहां दर्जनों ऐसे प्लांट बन चुके हैं जो पानी बेचकर लाखों कमा रहे हैं। देखा जाये, तो आज शहर में इनकी इतनी डिमांड बढ़ गई है कि यह कारोबार करोड़ों के पार हो गया है। वाटर कैन का यूज करने वालों की संख्या लाख से अधिक है।

यही नहीं सप्लाई किए जा रहे पानी में टीडीएस की मात्रा कितनी है यह भी चेक नहीं किया जाता है। पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक होने से यह हेल्थ के लिए काफी खतरनाक हो जाता है। इस तरह से आरओ के नाम पर साधे नल से पाइप के द्वारा कैन में पानी भरने वाले लोगों की सेहत बिगाड़ने के साथ उनकी जेब भी कट रहे हैं। जिसकी फिक्र न तो स्वास्थ्य विभाग को है और न ही फूड एंड सेफ्टी विभाग को। इसके चलते बेखौफ शहर में मिनरल वाटर के नाम पर दर्जनों अवैध प्लांट धड़ल्ले से चल रहे हैं।

कइयों के पास नहीं है ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस

बिना सील बंद पानी की विक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी आरेजसिटी में पानी के धंधेबाज प्रतिदिन कैन और वाटर कूलर के माध्यम से हजारों लीटर पानी की सप्लाई कर रहे हैं।

कैन पर न तो उसे तैयार करने की तिथि होती है, न ही उसके उपयोग की, बैच नंबर और लाइसेंस नंबर भी अंकित नहीं होता है।

इस तरह के कैन को खरीदकर प्यास बुझाने वाले लोगों का विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है।

अवैध तरीके से जो भी प्लांट संचालित हो रहे हैं, उनमें से किसी के पास भी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंटर्ड का लाइसेंस नहीं है, जबकि मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए यह लाइसेंस होना सबसे जरूरी होता है।

खुद से ही तय किया जाता है रेट

जानकारों की मानें तो पानी के धंधे की आड़ में कारोबारी वाटर कैन की बिक्री के रेट भी खुद से ही तय कर लेते हैं। कंपनियों में रेट अलग और घरों में अलग रेट पर पानी सप्लाई किया जा रहा है। एक वाटर कैन में 20 लीटर तक पानी आता है और यह 35 से 40 रुपए तक मार्केट में बेचा जा रहा है।

वहीं कुछ लोग छोटे-छोटे दुकानदारों तक 35 रुपये में 15 लीटर के वाटर कूलर में पानी की सप्लाई कर रहे हैं। इसमें शायद ही किसी वाटर कैन के पानी का स्वाद आरओ वाटर जैसा हो। पानी जब तक ठंडा रहता है, तब तक यह मीठा लगता है लेकिन जब इसका ठंडापन गायब होता है, तो पानी का स्वाद भी बदल जाता है।

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