आने में 5 घंटे की देरी, जाने में 8 घंटे 'विश्राम': नागपुर रेलवे के 'आधुनिक' टाइम-टेबल ने बिगाड़ा जनता का प्लान

Indian Railways AC Express: पुणे-अजनी एसी एक्सप्रेस घंटों की देरी से चलने पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। यात्रियों ने तंज कसते हुए ट्रेन का नाम ‘एसी पैसेंजर’ रखने की मांग कर दी।
5-Hour Delay on Arrival, 8-Hour 'Layover' on Departure: Nagpur Railway's 'Modern' Timetable Throws Public Plans into Disarray
रेलवे, एसी एक्सप्रेस, ट्रेन लेट, यात्री परेशानी, नागपुर,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Train Delay Pune Ajni Ac Express: नागपुर रेलवे भले ही खुद को आधुनिक, यात्री-केंद्रित और विश्व स्तरीय सेवाएं देने वाला विभाग बताने में कोई कसर नहीं छोड़ती हो लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों की पोल खोल देती है। ऐसा ही कुछ ट्रेन 22123 पुणे-अजनी एसी एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ हुआ जिन्होंने एसी एक्सप्रेस का किराया तो चुकाया लेकिन सफर किसी सुस्त रफ्तार पैसेंजर ट्रेन से भी बदतर रहा।

हालत इतनी खराब रही कि नाराज यात्रियों ने व्यंग्य करते हुए मांग कर डाली कि इस ट्रेन का नाम अब एसी एक्सप्रेस नहीं बल्कि एसी पैसेंजर कर दिया जाए, 5 घंटे लेट पहुंची, 8 घंटे लेट रवाना पुणे से अजनी के बीच चलने वाली ट्रेन संख्या 22123 अपने निर्धारित समय से करीब 5 घंटे की देरी से नागपुर पहुंची।

इससे यात्रियों की दिनभर की योजनाएं पूरी तरह चौपट हो गई। हैरानी की बात यह रही कि यही ट्रेन जब नागपुर से पुणे के लिए रवाना हुई तो उसकी देरी बढ़कर लगभग 8 घंटे तक पहुंच गई। सवाल यह उठ रहा है कि जब ट्रेन नियमित रूप से घंटों देरी से चल रही है तो उसे एक्सप्रेस कहने का औचित्य क्या रह जाता है?

पेंट्री सेवा भी निकली फिसड्डी

कैटरिंग सेवा की स्थिति भी किसी मजाक से कम नहीं थी। ट्रेन में मौजूद साइड पेंट्री सेवा पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। यात्रियों का आरोप है कि भोजन और पानी की उपलब्धता बेहद खराब रही। कई यात्रियों को समय पर खाना तक नहीं मिल पाया। वहीं पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ट्रेन घंटों लेट हो तो क्या यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ देना ही रेलवे की नई सेवा नीति बन गई है?

सुपरफास्ट का किराया, पैसेंजर जैसी रफ्तार

ट्रेन के बार-बार विभिन्न स्टेशनों पर रुकने और रेंगती हुई गति से चलने को लेकर भी यात्रियों में भारी नाराजगी दिखाई दी। उनका कहना है कि यदि सुपरफास्ट एसी एक्सप्रेस भी पैसेंजर ट्रेन जैसी चलेगी तो फिर यात्रियों से अतिरिक्त किराया क्यों वसूला जा रहा है? यही वजह है कि अब ट्रेन का नाम बदलकर पैसेंजर करने की मांग व्यंग्य के रूप में जोर पकड़ रही है।

ऑफिस, कारोबार और जरूरी काम प्रभावित

सुबह नागपुर पहुंचकर कार्यालयीन, व्यावसायिक या निजी कार्य निपटाने की योजना बनाकर निकले यात्रियों का पूरा कार्यक्रम गड़बड़ा गया। कई लोगों की बैठके छूटी तो कई यात्रियों के जरूरी काम प्रभावित हुए। समय पर पहुंचने के लिए अतिरिक्त किराया देकर एसी एक्सप्रेस का टिकट लेने वाले यात्रियों को आखिरकार निराशा ही हाथ लगी।

कोच अटेंडेंट ही गायब, यात्री बेहाल, पानी खत्म, सुविधाएं भी हुई गायब

यात्रियों की परेशानी सिर्फ देरी तक सीमित नहीं रही। ट्रेन के बी-3 कोच में यात्रियों की सुविधा के लिए नियुक्त अटेंडेंट ही नदारद था। एसी कोच में सफर कर रहे यात्रियों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी भटकना पड़ा। रेलवे यात्रियों से प्रीमियम किराया वसूलती है लेकिन बदले में बुनियादी सेवाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है।

ट्रेन की लंबी देरी का असर अन्य सुविधाओं पर भी पड़ा। कई शौचालयों में पानी खत्म हो गया था। घंटों तक ट्रेन में फंसे यात्रियों के लिए रेलवे प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को उठानी पड़ी।

DRM से हस्तक्षेप की मांग

01 इस पूरे मामले पर जेडआरयूसीसी सदस्य नितिन सौलके ने भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने मंडल रेल प्रबंधक गर्ग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सोलंके ने इस ट्रेन के बी-3 कोच में अटेंडेंट की अनुपस्थिति, पेंट्री कार की लापरवाही, शौचालयों में पानी की कमी और ट्रेन की लगातार लेटलतीफी की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 02 रेलवे एक और बुलेट ट्रेन, स्टेशन आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी ओर, एसी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में यात्रियों को पानी, भोजन और समय पर यात्रा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यात्रियों का यह सवाल पूरी तरह जायज लगता है कि आखिर यह एसी एक्सप्रेस है या फिर सिर्फ नाम की एक्सप्रेस?

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