बिल्डिंग है या झरना? नागपुर स्टेशन के इटारसी छोर पर बनी नई प्रशासनिक इमारत में फ्लोर से भी उभरा पानी

Nagpur Railway Station: नागपुर स्टेशन रिडेवलपमेंट की नई प्रशासनिक इमारत पहली ही बारिश में टपकने लगी। सीलिंग, दीवारों और फर्श से पानी रिसने पर निर्माण गुणवत्ता और परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं।
Is it a building or a waterfall? Water has welled up from the floor of the new administrative building at the Itarsi end of Nagpur station.
नागपुर रेलवे स्टेशन, पानी रिसाव, निर्माण गुणवत्ता,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
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Nagpur Railway Station Station Redevelopment: स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावों के बीच प्लेटफॉर्म-1 के इटारसी छोर पर बनाई गई नई प्रशासनिक इमारत पहली ही बारिश में अपनी असलियत बयां करती नजर आईं।

अभी इमारत पूरी तरह उपयोग में आई भी नहीं है कि महज 2 दिन की बारिश ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर इतने बड़े सवाल खड़े कर दिए जिनका जवाब देना मध्य रेल नागपुर मंडल और निर्माण एजेंसी रेलवे लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी, दोनों के लिए आसान नहीं होगा। स्थिति यह है कि इमारत की सीलिंग, दीवारें और फर्श मानो आपस में यह प्रतियोगिता कर रहे हों कि सबसे ज्यादा पानी कौन बहा सकता है।

दीवार और फर्श में भी लगी होड़ इमारत के भीतर केवल सीलिंग ही नहीं रो रही है बल्कि दीवारें भी अपने हिस्से का योगदान देने में पीछे नहीं, कई जगहों पर पानी इतनी तेजी से रिस रहा है कि ऐसा लग रहा है मानो दीवारों के भीतर पाइपलाइन में नल लगाया गया हो और ठेकेदार इसे बंद करना भूल गया, दूसरी ओर, फर्श भी किसी से कम नहीं। कई स्थानों पर नीचे से पानी उभरकर बाहर आता रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इमारत का हर हिस्सा बारिश के पानी को बाहर निकालने के बजाय अंदर जमा करने की भूमिका निभा रहा हो।

दीवारों से नल जैसी बह रही है धार

बुधवार को नई प्रशासनिक इमारत में जगह-जगह सीलिंग से लगातार पानी बहता नजर आया, कई स्थानों पर तो पानी की धार इतनी तेज रही जैसे ऊपर किसी ने नल खोल दिया हो। दीवारों की दरारों से भी लगातार पानी रिसता दिखा।

करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस इमारत को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पहली ही बारिश में यह हाल है तो पूरे मानसून के बाद इसकी स्थिति क्या होगी? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच केवल कागजों तक सीमित रह गई थी?

वेटिंग हॉल बना अस्थायी तालाब

  • यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय की हालत सबसे ज्यादा चिताजनक रही।
  • फर्श पर पानी भर जाने से यात्रियों को मजबूरी में कुर्सियों पर पैर चढ़ाकर बैठना पड़ा। कहीं फिसलने का डर था तो कहीं सामान भीगने की चिता।
  • जिस वेटिंग हॉल में यात्रियों को आराम मिलना चाहिए था वह कुछ ही देर की बारिश में अस्थायी जलाशय में बदल गया।
  • कई कमरों में भी पानी भर गया जिससे वहां कामकाज करना भी मुश्किल हो गया। यहां तक की यात्रियों के लिए लाखों की लागत वाले सोफे और अन्य सामान वाले कमरे में भी पानी भर गया। नुकसान का अंदाजा लगना कठिन है।

टॉयलेट में चल रहा 'पे एंड यूज' लेकिन यहां मुफ्त का शावर तय

स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत हेरिटेज भवन और उससे लगी पुरानी इमारत के कार्यालयों जैसे रेलवे सुरक्षा बल, ड्राइवर लॉबी और टिकट निरीक्षक कार्यालय पहले ही यहां शिफ्ट किए जा चुके हैं।

जल्द ही लोहमार्ग पुलिस थाना भी यहीं शिफ्ट किया जायेगा। उच्च श्रेणी यात्री प्रतीक्षालय को नई इमारत में स्थानांतरित किया जा चुका है जहां यात्रियों की सुविधा के लिए टॉयलेट भी बनाए गए हैं। लेकिन ठेकेदार ने शायद सुविधाओं की परिभाषा कुछ अलग ही समझ ली।

टॉयलेट की सीलिंग से इस तरह पानी बरस रहा था कि वहां आने वाले यात्रियों को अलग से शावर लेने की जरूरत ही नहीं पड़े। भीतर जाते ही अपने आप ही नहाना हो जायेगा।

रेलवे जहां अधिकांश स्टेशनों पर टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों से शुल्क वसूलता है वहीं यहां प्रकृति और निर्माण एजेंसी की संयुक्त पहल से मुफ्त का 'मौसमी शावर' उपलब्ध हो गया। सवाल यह है कि क्या यही है विश्व स्तरीय स्टेशन का नया मॉडल ?

करोड़ों खर्च, जवाबदेही किसकी ?

स्टेशन रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का उद्देश्य आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना बताया गया था लेकिन नई इमारत की यह तस्वीर कई असहज सवाल खड़े करती है।

क्या निर्माण सामग्री तय मानकों के अनुरूप इस्तेमाल की गई? क्या तकनीकी निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया? क्या निर्माण एजेंसी से गुणवत्ता की कोई जवाबदेही तय की जाएगी या फिर हर बार की तरह पहली बारिश का ठीकरा मौसम पर फोड़ दिया जाएगा? सवाल ये भी है कि क्या अब फिर से सीलिंग बनाई जायेगी, क्या फिर दीवारों और फर्श पर टाइल्स लगाई जायेगी? आखिर रेलवे राजस्व के इस नुकसान का जिम्मेदार कौन माना जायेगा, आरएलडीए, ठेकेदार कंपनी या खराब गुणवत्ता वाला निर्माण या फिर भारी भ्रष्टाचार?

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से सतीश दंडारे की रिपोर्ट

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