

Nagpur Travels Bus Road Safety: नागपुर शहर से रोजाना सैकड़ों निजी ट्रैवल्स बसें महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गुजरात की ओर रवाना होती हैं। इन बसों में यात्री कम और माल ज्यादा दिखाई देता है। हालत यह है कि कई बसों की डिक्की, छत और सीटों के नीचे तक पार्सलों से भरे रहते हैं लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन सामानों की कोई ठोस जांच नहीं हो रही। यात्री बसें बनीं चलती-फिरती गणेशपेठ, लकड़गंज, मालगाड़ी वर्धमाननगर, छत्रपति चौक, भांडे प्लॉट, छत्रपति चौक और कई प्रमुख चौराहों पर इन बसों को देखा जा सकता है।
वह किसी मिनी ट्रांसपोर्टनगर से कम नहीं लगता। ट्रैवल्स बसों के आसपास मजदूरों की टीम माल चढ़ाने और उतारने में जुटी रहती है। कपड़ों के बंडल, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, मोबाइल एक्सेसरीज, दवाइयों के कार्टन, ऑटो पार्ट्स, किराना सामग्री, मशीनरी पार्ट्स और बड़े-बड़े पैकेट धड़ल्ले से बसों में भरे जाते हैं। कई बसों में स्थिति इतनी खराब है कि यात्रियों के लगेज रखने की जगह तक नहीं बचती। सीटों के नीचे तक पार्सल ठूंस दिए जाते हैं।
नियमों के मुताबिक यात्री बसों में सीमित सामान ले जाने की अनुमति है लेकिन यहां नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं। हादसों का खतरा भी बढ़ा परिवहन नियमों के जानकारों की मानें तो ओवरलोड बसों में दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अतिरिक्त वजन से बस का संतुलन बिगड़ता है, ब्रेकिंग सिस्टम पर दबाव पड़ता है और इमरजेंसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित होती है। फिलहाल शहर में ओवरलोड का ओवरडोज लगातार जारी है।
नागपुर से हैदराबाद, रायपुर, भोपाल, इंदौर, सूरत और अहमदाबाद जाने वाली कई ट्रैवल्स बसे अब अनऑफिशियल कार्गो सेवा बन चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बसों में कौनसा सामान भेजा जा रहा है और उसका रिकॉर्ड किसके पास है? ऐसे में यदि किसी बस के जरिए अवैध, ज्वलनशील या संदिग्ध सामग्री भेजी जाए तो उसकी जवाबदेही तय करना मुश्किल हो सकता है।
कई ट्रैवल्स ऑपरेटरों के लिए यात्रियों से मिलने वाले किराये से ज्यादा आय अब माल ढुलाई से होने लगी है। यही कारण है कि ट्रैवल्स कार्यालयों के बाहर निजी एजेंट सक्रिय रहते हैं जो मिनटों में पार्सल बुकिंग और लोडिंग का काम करवा देते हैं। नागपुर शहर से बाहर निकलने वाले प्रमुख मार्गों में वर्धा रोड, अमरावती रोड, भंडारा रोड, उमरेड रोड, छिंदवाड़ा और कामठी रोड पर आरटीओ और परिवहन जांच नाकं मौजूद हैं।
रोजाना सैकड़ों ट्रैवल्स बसें इन मार्गों से गुजरती है लेकिन इन बसों की व्यवस्थित जांच शायद ही कभी होती हो। ओवरलोडिंग, अतिरिक्त पार्सल और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई लगभग न के बराबर दिखाई देती है। कई बसे क्षमता से ज्यादा माल लेकर राज्य की सीमाएं पार कर रही हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग की नजरें मानी बंद हो चुकी है।