

Preeti Akade Emotional Reaction On Remarriage: कोरोना महामारी का वह दौर कई परिवारों के लिए जीवनभर का न भूलने वाला दर्द दे गया था। उसी कठिन समय में अपने पति को खोकर दो बच्चों की पूरी जिम्मेदारी अकेले संभालने वाली प्रीति आकड़े के जीवन में आखिरकार खुशियों ने दोबारा दस्तक दी है। नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में आयोजित एक समारोह में प्रीति का पुनर्विवाह संपन्न हुआ।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कन्यादान की रस्म निभाई और शिवम व प्रीति के हाथ एक-दूसरे से मिलाए। शादी के बाद अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए प्रीति बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि इस नई शुरुआत और मिले संबल के बाद आज उनके पास अपनी खुशी जाहिर करने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं।
पूर्व विधायक संदीप जोशी की पहल ‘सोबत पालकत्व फाउंडेशन’ के तहत आयोजित इस विवाह समारोह में फडणवीस ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया। कोरोना महामारी के दौरान फडणवीस और संदीप जोशी ने मिलकर 293 परिवारों का अभिभावकत्व स्वीकार किया था। इनमें से 100 परिवारों की पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं उठाई थी। इन परिवारों की बेटियों के विवाह तक उन्हें हरसंभव सहयोग देने का संकल्प भी फडणवीस ने व्यक्त किया था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि कोरोना के कारण जिन परिवारों पर संकट आया है, उनकी बेटियों को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा और उनके विवाह तक हरसंभव सहयोग किया जाएगा। साथ ही अनाथ बच्चों को सरकारी नौकरियों में एक प्रतिशत आरक्षण मिलने से उनके आत्मनिर्भर बनने पर भी उन्होंने संतोष व्यक्त किया।
विवाह समारोह के दौरान प्रीति आकड़े ने कहा कि आज उनके पास अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके दोनों भाई मजबूती से उनके साथ खड़े हैं, यह उनके लिए बेहद खुशी की बात है।
प्रीति ने बताया कि कोविड महामारी के दौरान 19 से 25 वर्ष आयु वर्ग की करीब 293 युवतियों को अपने पति खोने का दुख झेलना पड़ा था। इसी दौरान ‘सोबत पालकत्व फाउंडेशन’ पहल के माध्यम से उनके साथ खड़े रहने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भी इस पहल को समर्थन दिया और स्वयं 100 परिवारों का अभिभावकत्व स्वीकार किया।
पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता संदीप जोशी ने कहा कि प्रीति का विवाह इस अच्छे कार्य की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जिन परिवारों ने अपने जीवनसाथी खोए, उनके साथ खड़े रहने के उद्देश्य से ‘सोबत’ पहल शुरू की गई थी और मुख्यमंत्री ने इसमें महत्वपूर्ण सहयोग दिया।