

Nagpur Police Bomb Squad: बम शोध व नाशक दस्ता (बीडीडीएस) पुलिस विभाग का सबसे महत्वपूर्ण विभाग है। क्यों कि शहर में बम विस्फोट का खतरा हो या वीआईपी की सुरक्षा, बीडीडीएस की टीम की जिम्मेदारी होती है जांच करने की। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि सिटी पुलिस ने शहर और वीआईपी, दोनों की सुरक्षा को दाव पर लगा दिया है। शहर पुलिस के बीडीडीएस में अधिकारियों के पास बेसिक ट्रेनिंग का भी अनुभव नहीं है।
वैसे सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस विभाग के हर अधिकारियों को विस्फोटकों की पहचान और एंटी साबोटेज जांच का थोड़ा बहुत अनुभव होना चाहिए, लेकिन जब बात विशेष विभाग की आती है तो बगैर प्रशिक्षण के कामकाज कैसे चलेगा यह गंभीर सवाल खड़ा होता है। बीडीडीएस में काम करने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी को तैनाती के साथ ही ट्रेनिंग करनी होती है। इसके लिए के लिए महाराष्ट्र इंटेलिजेंस अकादमी (एमआईए), पुणे में अलग-अलग स्तर के प्रशिक्षण निर्धारित हैं। लेकिन बेसिक ट्रेनिंग तो सभी को करनी होती है।
11 दिन के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार के उपक्रम शामिल है। जिसमें संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक की पहचान और सुरक्षित जांच, बम शोध और एंटी सैबोटेज जांच, विस्फोटकों और आईईडी की पहचान संबंधी प्रशिक्षण, बम डिस्पोजल के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाएं, आधुनिक बीडीडीएस उपकरणों का संचालन, एक्सप्लोजिव डिटेक्शन डॉग्स के साथ समन्वय, वीआईपी, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और कार्यक्रमों में एंटी सैबोटेज चेकिंग और घटना स्थल पर सुरक्षित घेराबंदी और इवेक्युएशन प्रोसीजर का समावेश होता है।
सूत्रों की माने तो विभाग में कार्यरत अधिकारियों ने बेसिक ट्रेनिंग भी पूरी नहीं की है। यदि टीम का नेतृत्व करने वाले अधिकारी ही प्रशिक्षित नहीं होंगे तो कर्मचारियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। सूत्रों की माने तो नागपुर सिटी पुलिस बीडीडीएस के वरिष्ठ पीआई विकास कानपिल्लेवार को विभाग में तैनात हुए 14 महीने हो गए हैं।
वहीं सेकंड पीआई राजेंद्र गुप्ता जून 2024 से यहां तैनात है। विभाग में तैनात दोनों ही मुख्य अधिकारियों ने बीडीडीएस की बेसिक ट्रेनिंग नहीं ली है। बीडीडीएस में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को अन्य की तुलना में हर माह 25 प्रश जोखिम भत्ता प्रदान किया जाता है। लेकिन इसके लिए बेसिक ट्रेनिंग पूरी करना आवश्यक है। अब ट्रेनिंग पूरी नहीं करने वाले अधिकारियों को यह भता मिल रहा है या नहीं, यह जांच का विषय है।
भले ही सप्ताह के 6 दिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई में या अन्य शहरों में रहते हों, लेकिन निजी निवास और उपराजधानी होने के कारण सप्ताह के अंत में एक चक्कर तो नागपुर में होता ही है। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी नागपुर के है। भले ही उन्हें सीआरपीएफ की तगड़ी सुरक्षा प्रदान की गई हो, लेकिन उनके नागपुर में होने पर बीडीडीएस को जांच करना होता है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई है।
नागपुर में उनके कार्यक्रम होने पर बीडीडीएस को हर जगह की जांच करनी होती है। वैसे भी नागपुर का नाम आतंकियों के टार्गेट लीस्ट में बहुत ऊपर है। संघ बिल्डिंग, हेडगेवार भवन, दीक्षाभूमी जैसे स्थानों की नियमित जांच की जाती है। ऐसे में बीडीडीएस की कमान उन हाथों में सौंपी गई है, जिनके पास प्रशिक्षण का अनुभव ही नहीं है।
बीते शुक्रवार की शाम सीपी विश्वास नागरे पाटिल अपनी बुलेट गाड़ी पर अचानक बीडीडीएस के कार्यालय पहुंच गए। यहां का हाल देखकर सीपी जमकर भड़के, स्टेशन डायरी पर मौजूद कर्मचारी ने शेविंग नहीं की थी और गले में सोने की चेन पहन रखी थी। उसकी हालत देखकर सीपी भड़क गए।
उन्होंने तत्काल कर्मचारी को हेड क्वार्टर रवाना करने के आदेश दिए। बताया जाता है कि ड्यूटी पर तैनाती के हिसाब से अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यालय में मौजूद नहीं थे। यहां पुलिस निरीक्षक की गैर मौजूदगी में सीपी ने जमकर फटकार लगाई और 3 इन्क्रीमेंट रोकने के आदेश दिए।
सीधी के इस औचक निरीक्षण से पूरे विभाग में खलबली मच गई है। वो कब और कहां पहुंचकर औचक जांच करेंगे, इसका कोई अनुमान नहीं लगा सकता। इसीलिए पुलिस विभाग के वॉट्सऐप ग्रुप में सभी को सावधानी बरतने के मैसेज भेजे जा रहे हैं।
हालाकि सीपी की फटकार के बाद बीडीडीएस कार्यालय में व्यवस्था चाकचौबंद करने की पहल भी शुरु की जा चुकी है। अधिकारियों ने कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान हर समय कार्यालय में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।