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पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली एलिफेंट कैंप में मौजूद 55 वर्षीय भीमा और 27 वर्षीय सुब्रमण्यम को जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
वन विभाग के अनुसार, कर्नाटक से विशेषज्ञों की टीम पेंच पहुंचकर दोनों हाथियों को विशेष प्रशिक्षण देगी।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद गड़चिरोली, गोंदिया और चंद्रपुर सहित विदर्भ के प्रभावित क्षेत्रों में जंगली हाथियों के हमलों की रोकथाम और रेस्क्यू अभियानों में इनका उपयोग किया जा सकेगा।
Vidarbha Human Elephant Conflict: विदर्भ में मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने कमर कस रखी है। इसके तहत पेंच टाइगर रिजर्व के 2 पालतू एशियाई नर हाथियों को जंगली हाथियों से लोहा लेने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। बता दें कि पेंच टाइगर रिजर्व के चोरबाहुली में एलिफेंट कैंप स्थापित किया गया था।
यहां 'भीमा' और 'सुब्रमण्यम' नामक हाथियों को मानव-हाथी संघर्ष रोकने और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रखा गया है। 55 वर्षीय भीमा और 27 वर्षीय सुब्रमण्यम को विशेष ट्रेनिंग देने के लिए वन विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है।
इन हाथियों का प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद गड़चिरोली, गोंदिया और चंद्रपुर समेत विदर्भ के अन्य जिलों में जंगली हाथियों के हमलों की रोकथाम में बड़ी मदद मिलेगी। सूत्रों ने बताया कि कर्नाटक से विशेषज्ञों की टीम पेंच पहुंचकर भीमा और सुब्रमण्यम को प्रशिक्षित करेगी।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनका उपयोग प्रभावित क्षेत्रों में जंगली हाथियों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकेगा। पेंच टाइगर रिजर्व के भीमा और सुब्रमण्यम को वर्ष 2023 में कर्नाटक से लाया गया था। हालांकि इन दोनों हाथियों को महाराष्ट्र में ही कैप्चर किया गया था लेकिन पुख्ता जगह नहीं होने की वजह से इन्हें कर्नाटक भेज दिया गया था।
वन अधिकारियों ने बताया कि जंगली हाथियों को काबू करने के लिए भीमा और सुब्रमण्यम की ट्रेनिंग के साथ महावत की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान देना अति आवश्यक होता है। जंगली हाथी काफी हद तक आक्रमक होते हैं। ऐसे में जंगली हाथियों को शांत करने के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना होने पर महावत की जान का जोखिम हो सकता है। इस कारण इन हाथियों का पूरी तरह से ट्रेंड होना जरूरी है।
पिछले कुछ वर्षों से विदर्भ में जंगली हाथियों का झुंड फसलों और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा रहा है। लगभग 3 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ से विदर्भ में दाखिल हुआ जंगली हाथियों का झुंड पहले गोंदिया में रुका। इसके बाद वह गड़चिरोली होते हुए तेलंगाना पहुंचा, यह झुंड लगातार 9 महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच आवाजाही कर रहा है। इससे निपटने के लिए वन विभाग व्यापक प्रबंधन एवं नियंत्रण योजना तैयार कर रहा है। अब तक इनका उपयोग पेच और आसपास के बाघ अभयारण्यों में बाघों के रेस्क्यू अभियान में किया जाता रहा है।
जंगली हाथियों को काबू करना जब कोई जंगली हाथी हिंसक हो जाता है या मानव बस्तियों में घुसकर उत्पात मचाता है, तब कुमकी हाथियों की मदद ली जाती है। ट्रैकुलाइजिंग में मदद घने जंगलों या दुर्गम इलाकों में जहां वाहन नहीं पहुंच सकते, वहां वन विभाग इन हाथियों की मदद से जंगली हाथी को बेहोशी का इंजेक्शन (डार्ट) लगाता है। झुंड से दूर करना ये अपनी ताकत और शांत स्वभाव से जंगली हाथियों को रास्ता दिखाते हैं या उन्हें वापस जंगल की तरफ खदेड़ते हैं।
बचाव कार्य किसी घायल, बीमार या दलदल में फंसे जंगली हाथी का पता लगाने और उसके बचाव एवं इलाज में भी मदद मिलती है। विशेष ट्रेनिंग इन्हें इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि तनावपूर्ण और खतरनाक स्थिति में भी ये घबराते नहीं है और केवल अपने महावत के आदेशों का पालन करते हैं।