

Nagpur Real Estate Fraud: नागपुर के मौजा परसोडी (खसरा नंबर 95/3) स्थित प्रस्तावित 'शिवाजी पार्क' लेआउट में दबंगई और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। वर्ष 1994 में अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी लगाकर प्लॉट खरीदने वाले 36 पीड़ित परिवार आज अपनी ही जमीन से बेदखल होने की कगार पर हैं। पीड़ितों का आरोप है कि मूल विक्रेताओं के वारिसों, बिचौलियों और बिल्डरों ने मिलीभगत कर 28 साल पुरानी जमीन का गैर-कानूनी तरीके से दोबारा सौदा कर दिया और मौके पर अवैध कब्जा जमा लिया।
1994 में संस्था के जरिए खरीदा था प्लॉट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 अगस्त 1994 को 'शंकर प्रसाद गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित' के माध्यम से मूल भू-स्वामी शेषराव शालिक धुर्वे और वामन शालिक धुर्वे से लगभग 3 एकड़ भूमि लेआउट के रूप में विकसित करने के लिए हस्तांतरित की गई थी। इस लेआउट में कविता विनय गंधे ने प्लॉट नंबर 17 और 18 के लिए 2 लाख रुपये और संध्या ज्ञानेश्वर खराडे ने प्लॉट नंबर 19 के लिए 1 लाख रुपये का भुगतान किया था। संस्था ने खरीदारों को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट टू सेल और रसीदें जारी कर जल्द पजेशन देने का वादा किया था।
बिल्डर की शह पर रातों-रात अवैध बाउंड्रीवॉल
वर्षों से रजिस्टर्ड सेल डीड का इंतजार कर रहे प्लॉटधारकों के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब मूल जमीन मालिकों के वारिसों ने 5 नवंबर 2022 को एक कथित गैर-पंजीकृत एग्रीमेंट के जरिए यह जमीन गौरीशंकर इटनकर और लुमेश्वर इटनकर को दोबारा बेच दी। आरोप है कि इसके बाद लोकेश इटनकर और प्रेम उपाध्याय की शह पर पूरी जमीन पर जबरन प्री-कास्ट कंपाउंडवॉल खड़ी कर कब्जा कर लिया गया। जब मूल खरीदार मौके पर पहुंचे तो दूसरों की दीवार देखकर दंग रह गए।
पुलिस और संस्था पर टालमटोल का आरोप
पीड़ितों का कहना है कि गृह निर्माण संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष दिवाकर पाटने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस थाने के चक्कर लगाने के बावजूद पुलिस जालसाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल कर रही है। हताश पीड़ित परिवार मंत्रालय तक गुहार लगा चुके हैं। पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि 1994 के सभी 36 प्लॉटधारकों को उनके प्लॉट का मालिकाना हक दिया जाए और धोखाधड़ी करने वाले भू-माफियाओं पर सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाए।