RSS मुख्यालय को उड़ाने की साजिश का 'डॉलर' कनेक्शन; पाकिस्तानी हैंडलर उमर ने रईस शेख को दी थी मोटी रकम

RSS Headquarters Recce Rais Ahmad Sheikh Pakistan Funding: संघ मुख्यालय की रेकी करने वाले जैश आतंकी रईस शेख की फ्लाइट टिकट का भुगतान डॉलर में हुआ था। कोर्ट में गवाही से खुलासा।
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RSS मुख्यालय की रेकी मामला में जमानत याचिका खारिज (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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RSS Headquarters Nagpur Recce: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के केंद्रीय मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को भेदने और उसकी रेकी करने के मामले में एनआईए (NIA) और महाराष्ट्र एटीएस (ATS) की चार्जशीट के बाद अब गवाहों के बयान सामने आ रहे हैं। कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया है कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा का रहने वाला रईस अहमद शेख अब्दुल्ला शेख बेहद गरीबी पृष्ठभूमि से आता था। पैसे के लालच में वह अपने एक स्थानीय मित्र के जरिए पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में आया और उसने भारत के खिलाफ इस आत्मघाती साजिश का हिस्सा बनना स्वीकार किया।

जांच रिकॉर्ड के अनुसार, रईस अहमद शेख 13 जुलाई 2021 को श्रीनगर से कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए मुंबई होते हुए नागपुर पहुंचा था। उसने 15 जुलाई 2021 तक नागपुर के रेशीमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर और संघ मुख्यालय के प्रतिबंधित क्षेत्रों की बारीकी से वीडियो रेकी की। इसके बाद वह दिल्ली होते हुए वापस श्रीनगर लौट गया था। उसकी इन संदिग्ध हवाई यात्राओं की बुकिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय 'वर्ल्ड पे' (World Pay) कार्ड का इस्तेमाल कर अमेरिकी डॉलर में भुगतान किया गया था, जिससे यह साबित होता है कि इस साजिश के पीछे सीधे तौर पर आईएसआई (ISI) और पाकिस्तानी हैंडलर्स का वित्तीय दिमाग काम कर रहा था।

लोकल स्लीपर सेल से मिलने वाली थी मदद

सीबीआई और एटीएस की संयुक्त जांच में यह बात भी सामने आई है कि पाकिस्तानी हैंडलर उमर ने रईस शेख को आश्वस्त किया था कि नागपुर पहुंचने पर वहां के कुछ स्थानीय स्लीपर सेल और कट्टरपंथी तत्व उसे लॉजिस्टिक, ठहरने की व्यवस्था और हथियार मुहैया कराएंगे। हालांकि, केंद्रीय खुफिया एजेंसियां और सुरक्षा बल पहले से ही रईस के डिजिटल फुटप्रिंट्स पर नजर रख रहे थे। सितंबर 2021 में कश्मीर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद उसने संघ मुख्यालय पर आत्मघाती हमले की इस पूरी साजिश को कबूल कर लिया।

विशेष अदालत में मजबूत हुई सरकारी पैरवी

नागपुर की सेंट्रल जेल में कड़े पहरे के बीच बंद रईस शेख को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने अदालत को बताया कि रईस के खिलाफ देशद्रोह, यूएपीए (UAPA) और मकोका के तहत पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। आतंकवादियों के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की कड़ियां सीधे तौर पर उसके यात्रा इतिहास से मेल खाती हैं। अदालत ने सरकारी दावों को सही मानते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे देशद्रोही तत्वों को किसी भी सूरत में जमानत नहीं दी जा सकती।

नागपुर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

इस बड़े खुलासे के बाद नागपुर में संघ मुख्यालय और स्मृति मंदिर के आसपास के तीन किलोमीटर के दायरे को 'नो ड्रोन जोन' घोषित कर सुरक्षा व्यवस्था को त्रिस्तरीय कर दिया गया है। खुफिया विभाग को अंदेशा है कि रईस शेख की गिरफ्तारी के बाद भी जैश-ए-मोहम्मद के कुछ अन्य मॉड्यूल देश के संवेदनशील ठिकानों की टोह लेने की कोशिश कर सकते हैं। स्थानीय पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि वे होटलों, लॉज और बाहरी राज्यों से आने वाले संदिग्ध नागरिकों के पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच करें।

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