

Nitin Gadkari Biochar agriculture Farmers Income: कृषि विकास और मृदा स्वास्थ्य के लिए तीन बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं- उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले बीज व कलम, नियमित मृदा परीक्षण और मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर बढ़ाना।
मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए जैविक कार्बन अति आवश्यक है और इसे बढ़ाने के लिए 'बायोचार' एक सबसे प्रभावी विकल्प है। बड़े पैमाने पर बायोचार का निर्माण कर यदि इसका उपयोग खेती में किया जाए, तो यह टिकाऊ कृषि को एक नई दिशा दे सकता है।
यह विश्वास केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने व्यक्त किया। एग्रोविजन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित 'बायोचार निर्माण परिषद' के उद्घाटन अवसर पर वे बोल रहे थे। सम्मेलन में पूरे महाराष्ट्र राज्य से बड़ी संख्या में युवा किसानों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि एग्रोविजन के माध्यम से सफल प्रयोगों और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ने से कृषि पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ यदि उसकी गुणवत्ता और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाई जाए, तो किसानों की आय में भी भारी बढ़ोतरी होगी। बायोचार जैसी विभिन्न आधुनिक तकनीकों की आर्थिक व्यावहारिकता सिद्ध करके इसे व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
क्या है 'बायोचार निर्माण परिषद' कृषि में फसलों के अवशेष, पराली, तिनके, भूसा, सूखीं टहनियां, नारियल के छिलके और अन्य जैविक कचरा भारी मात्रा में निकलता है।
आज का किसान जागरूक है और नए प्रयोग कर रहा है। आधुनिक तकनीक का सही उपयोग कर किसानों के जीवनस्तर में सुधार लाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
सम्मेलन के दौरान मंच पर एग्रोविजन फाउंडेशन के अध्यक्ष रवी बोरटकर, सचिव डॉ. सी. डी. माथी, धैर्यशील बावस्कर, उदय कुमार मठपती, उषा बरवाले, आनंद राऊत उपस्थित थे।
केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक तथा वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के केशव क्रांती ने टिकाऊ और पुनर्योजी खेती के लिए बायोचार बनाने के आसान और कम खर्चीले तरीके बताए। कपास के अवशेषों और अन्य कृषि कचरे का उपयोग करके अफ्रीका और एशिया के छोटे किसानों के लिए अत्यंत कम लागत वाली तकनीक कैसे विकसित की गई है।