NEERI ने बदली कोराडी की तस्वीर, हरे-भरे जंगल में तब्दील हुई फ्लाई ऐश की जमीन

Nagpur Koradi Power Plant : नागपुर में स्थित कोराडी पावर प्लांट के आस-पास फ्लाई ऐश डंपिंग साइट अब एक हरे-भरे जंगल में तब्दील हो चुका है। यहां अब फ्लाई ऐश जमीन में भी साफ हवा का एहसास किया जा सकता है।
Nagpur Koradi Power Plant : नागपुर में स्थित कोराडी पावर प्लांट के आस-पास फ्लाई ऐश डंपिंग साइट अब एक हरे-भरे जंगल में तब्दील हो चुका है। यहां अब फ्लाई ऐश जमीन में भी साफ हवा का एहसास किया जा सकता है।
नीरी ने बदली कोराडी की तस्वीर (सौजन्य-एएनआई)
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Koradi Power Plant : सीएसआईआर-नीरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह ने महाजेनको (महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी) के सहयोग से कोराडी में 1,500 हेक्टेयर जहरीली फ्लाई ऐश भूमि पर 5 लाख से अधिक पेड़ लगाकर उसे हरे-भरे बांस के जंगल में बदल दिया है। एक समय में राख की भूमि कही जाने वाली ये भूमि आज हरे-भरे जंगल में विकसित हो गई है, जिससे इसके आस-पास रहने वाले लोगों को चैन की सांस आई है।

इस कायाकल्प के बारे में सीएसआईआर-नीरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. लाल सिंह ने बताया, "लोग यहां उद्योग द्वारा उत्पन्न धूल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। 2015 और 2016 के बीच, महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री ने हमें फोन किया और इस पर चिंता व्यक्त की। सीएसआईआर-नीरी ने 5 मापदंडों के साथ एक पर्यावरण-कायाकल्प तकनीक विकसित की।"

बांस का किया चुनाव - नीरी वैज्ञानिक

नीरी ने यहां स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर जमीन को बदलने का काम किया। अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "हमने बांस का चयन किया क्योंकि यह तेजी से बढ़ता है, सही परिस्थितियों में प्रति माह एक मीटर तक बढ़ता है। छह महीने के भीतर, हमारे पास 20-25 फुट ऊंचे बांस थे जो खतरनाक धूल को दबा रहे थे। हमने हवा में उड़ने वाली राख में 90% की कमी दर्ज की। यह पर्यावरणीय बहाली, आर्थिक लाभ और सामाजिक उत्थान को एक साथ लाता है। महाजेनको ने प्रत्येक 10 हेक्टेयर के लिए 20 महिलाओं को रोजगार दिया। ये महिलाएं कमाने और अपने बच्चों को स्कूल भेजने में सक्षम थीं।

आर्थिक स्थिति भी हुई बेहतर - पद्मा निषाद

इस बदलाव के बाद यहां रहने वाले लोगों के चहरों पर भी मुस्कान खिल उठी। यहां के लोग जिस जमीन को बंजर मान चुके थे, अब वे उनके लिए सुरक्षित हवा का स्त्रोत बन गई और उनकी मेहनत रंग लाई। स्वयं सहायता समूह की सदस्य पद्मा निषाद ने कहा, "यह पूरा इलाका पहले धूल से ढका बंजर ज़मीन हुआ करता था। हमने यहां बांस लगाने के लिए बहुत मेहनत की। हम साल भर यहां काम करते हैं और 5,000 रुपये मासिक वेतन कमाते हैं। इस काम से हमारी आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है। अब, मैं घर पर भी थोड़ा-बहुत योगदान दे पा रही हूं, जिससे मेरे बच्चों की पढ़ाई का खर्चा चल रहा है।"

सात सालों से की मेहनत - सहारे

स्वयं सहायता समूह की सदस्य प्रणाली सहारे ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा, "यह फ्लाई ऐश डंपिंग साइट है, और यहां पहले बहुत धूल उड़ती थी। इस इलाके में पेड़ लगाना बेहद मुश्किल था। लेकिन नीरी के डॉ. लाल सिंह ने हमारा हौसला बढ़ाया और कहा कि यहां पौधे उगाना संभव है। हम फ्लाई ऐश के गड्ढों में उतरे और पेड़ लगाए। आज, हमने एक हरा-भरा बांस का बगीचा तैयार कर लिया है। हम पिछले सात सालों से यहां काम कर रहे हैं। इस काम ने हमें आर्थिक मदद दी है, और अब हम अपने बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों में मदद कर पा रहे हैं।"

नागपुर में नीरी की यह पहल न केवल कोराडी के लोगों को रोजगार दे रही है बल्कि यहां के लोगों के लिए साफ और सुरक्षित हवा का बंदोबस्त भी कर रही है। ताकि यहां के लोगों को स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से आगे गुजरना न पड़े। ये पहल न केवल यहां के लोगों के स्वास्थय को बल्कि पर्यावरण को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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