

Koradi Mahalaxmi Jagdamba Temple Nagpur: महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित श्री महालक्ष्मी जगदंबा माता मंदिर, कोराडी विदर्भ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नागपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त मां का आशीर्वाद लेने आते हैं। मंदिर की पहचान स्थानीय लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़ी है।
मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में कोराडी क्षेत्र को जाखापुर कहा जाता था। यहां राजा झोलन का शासन था। उनके सात पुत्र थे, लेकिन कोई पुत्री नहीं थी। पुत्री की कामना से राजा ने यज्ञ, हवन और तपस्या की।
मान्यता है कि इसके बाद रानी गंगासागर ने एक कन्या को जन्म दिया, जिसका नाम जाखुमाई बताया जाता है। लोककथा में जाखुमाई को देवी शक्ति का स्वरूप माना गया है।
एक प्रचलित कथा के अनुसार, राजकुमारी जाखुमाई ने पड़ोसी राज्य के राजा के साथ हुए युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। युद्ध के बाद राज्य लौटते समय उन्होंने सूर्यास्त होने पर एक स्थान पर रुकने का निर्णय लिया। इस स्थान को वर्तमान कोराडी से जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि यहीं जाखुमाई मां महालक्ष्मी जगदंबा के दिव्य स्वरूप में प्रकट हुईं। मंदिर में विराजमान देवी की प्रतिमा को श्रद्धालु स्वयंभू मानते हैं। यह विवरण धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं।
कोराडी मंदिर के इतिहास को लेकर उपलब्ध स्थानीय विवरणों में नागपुर के भोसले मराठा राजवंश के शासनकाल का उल्लेख मिलता है। मंदिर के जीर्णोद्धार का संबंध 17वीं शताब्दी से बताया जाता है, हालांकि इसकी मूल स्थापना की सटीक तारीख स्पष्ट नहीं है। मंदिर परिसर के प्रबंधन के लिए श्री महालक्ष्मी जगदंबा संस्थान की स्थापना 24 जुलाई 1987 को की गई थी।
लगभग 150 एकड़ में फैला यह देवस्थान अपने विशाल परिसर के लिए जाना जाता है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, दर्शन के लिए विस्तृत कतारें, दीपस्तंभ, सभामंडप और धार्मिक गतिविधियों के लिए विभिन्न स्थान मौजूद हैं।
मंदिर के पास स्थित कोराडी झील आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाती है। रात के समय मंदिर की रोशनी इसकी भव्यता को और आकर्षक बना देती है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
नागपुर के पास स्थित श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर, कोराडी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच एक विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि यहां विराजमान मां महालक्ष्मी जगदंबा की स्वयंभू प्रतिमा दिन में तीन अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देती है।
भक्त इन स्वरूपों को देवी की दिव्य शक्ति और महिमा से जोड़कर देखते हैं। मान्यता के अनुसार, मां के इन रूपों में उनके विभिन्न गुणों और शक्तियों की झलक मिलती है। यही वजह है कि मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए देवी के दर्शन का विशेष महत्व है।
नागपुर शहर के प्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी जगदंबा मंदिर, कोराडी में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योतियों का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर मंदिर परिसर के विशेष ज्योत भवन में श्रद्धालुओं की ओर से करीब 7,500 अखंड मनोकामना ज्योतियां प्रज्वलित की जाती हैं। इन दीपकों को मां जगदंबा के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। बड़ी संख्या में एक साथ जलती ज्योतियां मंदिर परिसर को भक्तिमय वातावरण से भर देती हैं।
नवरात्रि के पहले दिन प्रज्वलित की जाने वाली अखंड मनोकामना ज्योतियों को पूरे नवरात्रि उत्सव के दौरान लगातार जलाए रखने की परंपरा है। इन ज्योतियों की देखरेख के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है, ताकि तेल या घी की कमी के कारण दीपक बुझने न पाएं। श्रद्धालु अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन ज्योतियों को प्रज्वलित करवाते हैं।
कोराडी मंदिर में नवरात्रि के दौरान प्रज्वलित होने वाली हजारों मनोकामना ज्योतियों के अलावा मां जगदंबा के सामने एक मुख्य अखंड महाज्योति भी जलती है। मंदिर संस्थान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस महाज्योति को सालभर यानी 365 दिन प्रज्वलित रखने की व्यवस्था की गई है। यह ज्योति भक्तों की अटूट श्रद्धा और देवी के प्रति समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
जो श्रद्धालु अपने या अपने परिवार के नाम से कोराडी मंदिर में अखंड मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करवाना चाहते हैं, वे मंदिर संस्थान के माध्यम से इसकी व्यवस्था कर सकते हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके लिए ₹2,100 शुल्क का उल्लेख मिलता है। इस तरह, कोराडी मंदिर में नवरात्रि के दौरान हजारों अखंड ज्योतियों का प्रज्वलन इस धार्मिक स्थल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में पूजा, आरती और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग से संबंधित जानकारी में इस अवसर पर करीब 20 लाख या उससे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख मिलता है।
भक्त मां महालक्ष्मी जगदंबा को शक्ति, समृद्धि और संरक्षण का प्रतीक मानते हैं। नागपुर के अलावा महाराष्ट्र के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।