नागपुर जिले के नरखेड़ में बंधारा मरम्मत की मांग तेज, टूटी पुलिया से बह रहा पानी, किसानों को हो रहा नुकसान

Nagpur Narkhed Tehsil News: नरखेड़ तहसील के सारडी गांव में दो साल से टूटी पुलिया की मरम्मत नहीं होने से किसान नाराज हैं। बारिश का पानी बह जाने से खेती और सिंचाई पर असर पड़ रहा है।
Demand for the repair of the weir in Narkhed, Nagpur district, intensifies; water is flowing through a damaged culvert, causing losses to farmers.
नरखेड़ तहसील, टूटी पुलिया, (सोर्स: नवभारत फाईल फोटो)
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Nagpur Narkhed Tehsil Damaged Barrage: नागपुर जिले के नरखेड़ तहसील के मौजा सारडी में पिछले दो वर्षों से टूटी हुई पुलिया (बंधारा) की मरम्मत अब तक नहीं होने से किसानों में भारी नाराजगी व्याप्त है। बंधारा टूट जाने के कारण बारिश का पूरा पानी बहकर निकल जाता है, जिससे आसपास के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

इस मामले को लेकर किसान रंजन हरिभाऊ रेवतकर ने तहसीलदार नरखेड़, सिंचाई विभाग नरखेड़, खंड विकास अधिकारी तथा कृषि अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई है।

किसानों में नाराजगी किसान रंजन रेवतकर ने संबंधित अधिकारियों के पास कई चार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की है।

उन्होंने आगामी बारिश के पहले बंधारे की तत्काल मरम्मत करने की मांग की है, अन्यथा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। वहीं, ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की निष्क्रयता के कारण किसानों को हो रहे नुकसान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी की है।

सिंचाई का गंभीर संकट, फसलों पर हो रहा असर

जानकारी के अनुसार, मौजा सारडी के गट नंबर 111/3, 111/2 और 111/1 क्षेत्र की कृषि भूमि के लिए यह बंधारा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दो वर्ष पहले सिंचाई विभाग द्वारा इस बंधारे की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब होने के कारण पहली ही बारिश में यह बह गया। इसके बाद आज तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, ऐसा किसानों का आरोप है।

बंधारा टूटने से इलाके का भूजल स्तर लगातार घट रहा है और कुओं में पानी की कमी हो रही है। इसके चलते गर्मी के मौसम में सिंचाई का गंभीर संकट पैदा हो गया है। जिसका सीधा असर किसानों की फसलों पर पड़ रहा है।

विशेष बात यह है कि सरकार जल संरक्षण और जलयुक्त शिवार जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, ऐसी चचर्चा क्षेत्र में हो रही है।

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