नायब तहसीलदार भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी, नहीं मिले सबूत, विशेष अदालत ने खारिज किए आरोप

Naib Tehsildar Corruption Case: नायब तहसीलदार के रेत के अवैध उत्खनन मामले में रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में विशेष अदालत ने तहसीलदार को बरी कर दिया है।
Naib Tehsildar Corruption Case: नायब तहसीलदार के रेत के अवैध उत्खनन मामले में रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में विशेष अदालत ने तहसीलदार को बरी कर दिया है।
नागपुर न्यूज
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Nagpur News: नागपुर में रेत के अवैध उत्खनन को जारी रखने के लिए रिश्वत मांगी गई। जिसकी शिकायत भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग से की गई। जाल बिछाकर नायब तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी मामले में सुनवाई के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत के जिला व सत्र न्यायाधीश एस.एस. मोदेकर ने साक्ष्यों के अभाव के आधार पर नायब तहसीलदार नवनाथ काठकड़े को भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी कर दिया है।

अभियोजन पक्ष का दावा था कि साहिल सैयद से मिली शिकायत के आधार पर अभियुक्त काठकडे ने उसके दो ट्रकों को जब्त कर लिया था क्योंकि वे रेत के अवैध खनन में शामिल थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अभियुक्त ने ड्राइवर से रिश्वत की मांग की थी और बाद में शिकायतकर्ता को फोन करके अवैध रेत उत्खनन जारी रखने की अनुमति देने के लिए प्रति चक्कर 4000 रुपये की मांग की थी। इसके अतिरिक्त 60,000 रुपये के साथ एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड की भी मांग की गई थी।

रंगे हाथ किया था गिरफ्तार

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने पंच गवाहों को बुलाया था और मांग के सत्यापन के बाद शिकायतकर्ता को पंच गवाहों के साथ 20,000 रुपये के दूषित नोटों, एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड के साथ भेजा था। जिनके पैकेट भी फेनोल्फ्थेलिन पाउडर लगाया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार जब अभियुक्त ने राशि और सामान स्वीकार कर लिया, तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रैप के दौरान हुई सभी बातचीत को वॉयस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद चार्जशीट दायर की गई और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए 6 गवाहों की जांच की।

साक्ष्यों में है विरोधाभास

अभियुक्त की ओर से पैरवी कर रहे अधि. प्रकाश नायडू ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता और शैडो पंच गवाह जिरह की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए और उनके साक्ष्यों में विभिन्न प्रतिकूल स्वीकृतियां और विरोधाभास सामने आए। नायडू ने बताया कि मुख्य गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विसंगतियां थीं, जो न केवल शिकायतकर्ता और साथ आए शैडो गवाह के बयानों का खंडन करती थीं, बल्कि अन्य गवाहों और जांच अधिकारी के बयानों में भी महत्वपूर्ण विसंगतियां थीं।

अभियोजन पक्ष का दावा इसलिए भी विफल हो गया क्योंकि न केवल शिकायतकर्ता बल्कि शैडो पंच गवाह ने भी जिरह में स्वीकार किया कि भले ही पंचनामों में शैडो पंच गवाह को कथित मांग सत्यापन और ट्रैप कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता के साथ दिखाया गया था, उन्होंने स्वीकार किया कि शैडो पंच गवाह वास्तव में दूर रहा था और उसने न तो कथित मांग देखी थी और न ही कथित दूषित राशि की स्वीकृति का गवाह था। सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी कर दिए। अभियुक्त की ओर से अधि। प्रकाश नायडू, मितेश बैस, होमेश चौहान, सुरभि (नायडू) गोडबोले और ध्रुव शर्मा ने पैरवी की।

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