नागपुर विवि में 'रिजल्ट' का संकट: शीत सत्र के 50% नतीजे अब तक अटके, छात्रों का भविष्य अधर में

RTMNU Result Delay: नागपुर विश्वविद्यालय की सुस्ती और नई परीक्षा कंपनी की विफलता ने शीत सत्र के 50% से अधिक परिणामों को रोक दिया है, जिससे ग्रीष्मकालीन परीक्षाओं के शेड्यूल पर संकट मंडरा रहा है।
Nagpur University Result Delay
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
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Nagpur University Result Delay: मार्च का महीना बीत गया, लेकिन नागपुर विश्वविद्यालय अब तक शीत सत्र के 50 प्रतिशत से अधिक परिणाम घोषित नहीं कर सका। हर वर्ष जहां मार्च के अंतिम सप्ताह में ग्रीष्म कालीन सत्र की परीक्षाएं प्रारंभ हो जाती थीं, वहीं इस वर्ष पूरा परीक्षा शेड्यूल ही बुरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है। इससे न केवल विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि प्राध्यापकों की भी मुश्किलें बढ़ेंगी। इस देरी ने विवि की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा से जुड़ा कार्य संभाल रही नई कंपनी अपेक्षित स्तर का प्रदर्शन करने में विफल रही है। तकनीकी दक्षता और अनुभव की कमी अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इसके बावजूद विवि प्रशासन स्थिति को सुधारने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।

शीत सत्र के परिणामों में हो रही देरी ने हजारों छात्रों को असमंजस में डाल दिया है। छात्र न तो आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन कर पा रहे हैं और न ही रोजगार के अवसरों का लाभ उठा पा रहे हैं। कई छात्रों का कहना है कि महीनों से परिणामों का इंतजार करते-करते उनका एक शैक्षणिक वर्ष ही प्रभावित होने की कगार पर है। शीत सत्र की परीक्षाएं जनवरी से ली गईं। करीब 11,500 परीक्षाएं ली गईं। इनमें से करीब 500 परीक्षाओं के परिणाम घोषित हुए, जबकि 600 से अधिक पेंडिंग हैं।

फाइनल ईयर के छात्रों में घबराहट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीष्म सत्र समय पर शुरू नहीं हुआ, तो इसका सबसे अधिक असर फाइनल ईयर के छात्रों पर पड़ेगा। इसी सत्र में अंतिम परीक्षाएं आयोजित होती हैं, जिनके आधार पर छात्रों की डिग्री और करिअर तय होता है। देरी का सीधा मतलब है कि डिग्री में विलंब, प्लेसमेंट प्रभावित और उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित रहना। इतना ही नहीं, परीक्षा प्रणाली में लगातार तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया बार-बार बाधित हो रही है। ऑनलाइन सिस्टम अस्थिर है और डेटा प्रोसेसिंग में त्रुटियां आम हो चुकी हैं। ग्रीष्म सत्र की परीक्षा व्यवस्था में भी पहले से ही कई गड़बड़ियों के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह आशंका और प्रबल हो गई है कि आने वाले परिणामों में भी भारी देरी और त्रुटियां देखने को मिलेंगी।

कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे

  • छात्रों का नामांकन कार्य लंबित
  • दीक्षांत समारोह के महीनों बाद भी डिग्री प्रमाणपत्रों की छपाई अधूरी
  • परीक्षा फॉर्म प्रक्रिया अस्थिर
  • भौतिक अंकसूची अब तक वितरित नहीं
  • परिणामों में सुधार की प्रक्रिया अस्पष्ट

जवाबदेही का पूर्ण अभाव

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले में कंपनी की विफलता तो सामने आ रही है, लेकिन विवि का कोई भी अधिकारी अब तक जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। इतनी बड़ी अव्यवस्था के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की जवाबदेही तय न होना कई सवाल खड़े करता है।

सूत्रों के अनुसार, किसी अज्ञात कारण या दबाव के चलते अधिकारी न तो कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं और न ही सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आ रहा है। विश्वविद्यालय का एक प्रमुख छात्र संगठन, जो पिछले वर्षों में छात्र हितों के मुद्दों पर काफी सक्रिय रहता था, इस बार पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। छात्रों का कहना है कि जब उसे सबसे ज्यादा आवाज उठाने की जरूरत थी, तब यह संगठन कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। इस चुप्पी ने छात्रों में और अधिक निराशा पैदा की है।

दबाव में काम करने की आशंका

विवि के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन और संबंधित छात्र संगठन किसी न किसी दबाव में काम कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि कंपनी के लगातार खराब प्रदर्शन के बावजूद उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सवाल उठते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो ग्रीष्म सत्र पूरी तरह प्रभावित हो सकता है और परीक्षा प्रणाली ‘टोटल कोलैप्स’ की स्थिति में पहुंच सकती है।

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