नागपुर में रेत तस्करी पर एक्शन, कल्लू खान गैंग पर MCOCA के तहत केस दर्ज, व्हाट्सएप नेटवर्क से चलता था रैकेट

Nagpur Sand Smuggling: नागपुर ग्रामीण पुलिस ने रेत तस्करी के मास्टरमाइंड कल्लू खान की गैंग पर मकोका लगाया। व्हाट्सएप के जरिए चल रहे नेटवर्क का खुलासा, 9 सदस्यीय गिरोह पर सख्त कार्रवाई।
Crackdown on Sand Smuggling in Nagpur: Case Registered Against 'Kallu Khan Gang' Under MCOCA; Racket Operated via WhatsApp Network
नागपुर रेत तस्करी, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Illegal Mining Maharashtra: नागपुर के पूरे विदर्भमें वाट्सएप ग्रुप के जरिये रेत तस्करी के मास्टरमाइंड खरबी निवासी मोहम्मद इनाजुल उर्फ कल्लू खान की 9 सदस्यीय गैंग पर नागपुर ग्रामीण पुलिस के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार द्वारा मामले की गंभीरता को समझते हुए कल्लू गैंग पर मकोका लगा दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल को ग्रामीण पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पवनी परिसर में फील्डिंग लगाकर टिप्पर (एमएच 49/बीजेड-1717) के चालक खरबी निवासी कैसर अली रियाजउद्दीन अली को फर्जी रायल्टी रसीद के जरिये रेल तस्करी करते रंगेहाथ पकड़ा था। उस समय टिप्पर का स्काटिंग कर रही कार (एमएच 49/सीडी-4577) में बैठे कल्लू को भी मौके से गिरफ्तार किया गया था।

एडमिन की तलाश जारी

दोनों से पूछताछ के बाद गुडेगाव, जिला भंडारा निवासी सूरज दिलीप गभने (27) और डोंगरगाव, तह-कुही निवासी दिनेश मधुकर को भी दबोचा गया। आरोपियों को कोर्ट द्वारा 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

मामले में 5 आरोपी फरार थे जिनमें से 3 और दबोचे गये। हालांकि अभी नाम 4 ही आरोपियों के सामने आये। फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने तस्करी के लिए उपयोग किये जाने वाले वाट्सएप ग्रुप के एडमिन की तलाश भी तेज कर दी है।

कई थानों में मामले दर्ज इस पूरी गैंग का असली मास्टरमाइंड कल्लू है।

उस पर राज्य के अल्पसंख्यक आयोग के बड़े पदाधिकारी का हाथ कहा जाता रहा है। कल्लू लंबे समय से फर्जी रायल्टी के जरिये विदर्भ में रेत तस्करी में शामिल रहा है। उसके खिलाफ भिवापुर, उमरेड, नागपुर ग्रामीण समेत नागपुर शहर और जिला भंडारा में अवैध रेत तस्करी के कई

मामले दर्ज हैं। उसकी आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए पहले भी उस पर प्रतिबंधक कार्यवाही भी की जा चुकी है। इसके बावजूद वह बेखौफ रेत तस्करी में शामिल रहा।

एक्शन मोड में पुलिस-प्रशासन

ग्रामीण पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा कल्लू की गिरफ्तारी के साथ ही सताधारी पार्टी के नेताओं ने उसके बचाव में कॉल करने शुरू कर दिये थे। हालांकि पुलिस ने दवाव में आने के बजाय अपना एक्शन जारी रखा और गिरफ्तारियों का क्रम शुरू है। पुलिस अधीक्षक पोद्दार ने कहा कि गैंग के क्रम रिकॉर्ड और तस्करी की गतिविधियों को देखते हुए मकोका लगाया गया, गैंग के फरार सदस्यों की तलाश की जा रही है।

अपने आकाओं के आशीर्वाद से कल्लू ने पूरे विदर्भ में अपने अपना नेटवर्क फैलाया और रेत तस्करी से राज्य को करोड़ों के राजस्व की चोट पहुंचाई उल्लेखनीय है कि इससे पहले राजस्व मंत्री बावनकुले भी बयान दे चुके हैं कि रेत तस्करों पर नकेल कसकर राजस्व की हानि रोकी जायेगी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस के बाद अब राजस्व विभाग भी रेत तस्करों की गैंग पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

ऐसे कई वाट्सएप ग्रुप एक्टिव

विदर्भ में ऐसे कई वाट्सएप ग्रुप एक्टिव हैं जिनके जरिये धड़ल्ले से रेत तस्करी की जाती है। किस अधिकारी की गाड़ी कितने बजे, कहां से गुजरेगी, ये तक तस्करों को पता होता है।

किस टिप्पर की रायल्टी एक बार कटी है और कितनी बार उपयोग की गई है, इसका पूरा हिसाब भी इसी ग्रुप पर शेयर किया जाता है। हर ग्रुप का एडमिन गैंग का सरगना होता है

कल्लू की गिरफ्तारी ने सभी एडमिनों को सतर्क कर दिया है। विदर्भ की रेत तस्करी में कल्लू एक बड़ा नाम है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी और राजनीतिक दखल के बावजूद कोई मुरव्वत न होती देख बाकी एडमिन अंडरग्राउंड हो गये हैं।

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