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नागपुर मनपा में हंगामा, 4 मिनट में करोड़ों के प्रस्ताव पास, विपक्ष ने लगाया 19 करोड़ के घोटाले का आरोप

Nagpur News: नागपुर महानगरपालिका की स्थायी समिति बैठक में भारी बवाल। कांग्रेस सदस्यों ने सत्ता पक्ष पर तानाशाही और भ्रष्टाचार छिपाने का आरोप लगाते हुए सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Mar 31, 2026 | 12:32 PM

नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विपक्ष के नेता संजय महाकालकर व अन्य (फोटो: नवभारत)

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NMC Standing Committee Meeting: नागपुर महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में सोमवार को पक्ष-विपक्ष में भारी संघर्ष देखने को मिला। स्थायी समिति में कांग्रेस पक्ष के सदस्य अभिजीत झा, वसीम खान, अभिषेक शंभरकर और अन्य ने सत्ता पक्ष पर तानाशाही रवैया अपनाने और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जनहित और करोड़ों रुपये के प्रस्तावों से जुड़ी यह महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी चर्चा के मात्र 4 मिनट में समाप्त कर दी गई। यह एक तरह से भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश है।

सदस्यों का मानना था कि भले ही प्रशासक काल में कार्यों को प्रशासकीय मंजूरी दी गई हो लेकिन वित्तीय मंजूरी के लिए जब स्थायी समिति के समक्ष विषय रखे जा रहे हैं तो कार्यों को नियमों के अनुसार मंजूरी दी गई है या नहीं, इसे ठोंक-बजाकर देखना स्थायी समिति का काम है। वही काम कर रहे है लेकिन सभापति यह करने नहीं दे रही हैं।

बिना चर्चा के पास कर दिए गए प्रस्ताव

कांग्रेस सदस्यों का कहना है कि नियमानुसार बैठक का एजेंडा 8 दिन पहले दिया जाता है, ताकि विषयों का अध्ययन कर उस पर सवाल या विरोध दर्ज किया जा सके लेकिन नागपुर मनपा की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सभापति ने विपक्ष की एक नहीं सुनी। बैठक शुरू होते ही विषय क्रमांक 23, 24, 26, 27 और 28 को आनन-फानन में मंजूर कर लिया गया और 11 सत्ता पक्ष के सदस्यों के शोरगुल के बीच महज 4 मिनट में बैठक खत्म कर दी गई। जब कांग्रेस सदस्यों ने जीआईएस और अन्य मुद्दों पर सवाल पूछने की कोशिश की तो सभापति ने उन पर ‘डेकोरम’ (मर्यादा) के उल्लंघन का आरोप लगा दिया। सदस्यों ने यह भी बताया कि पिछली 2 बैठकों में गांधीबाग गार्डन व अन्य मुद्दों पर मांगी गई जानकारी उन्हें अब तक प्रशासन द्वारा नहीं दी गई है।

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19 करोड़ स्वाहा, डेवलपमेंट प्लान का अता-पता नहीं

विपक्ष ने मोनार्च सर्वेयर नामक कंपनी के काम पर बड़ा सवालिया निशान लगाया है। आरोप है कि साल 2018 से अब तक डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के नाम पर इस कंपनी पर 19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन शहर का डेवलपमेंट प्लान आज तक बनकर तैयार नहीं हुआ है। महानगरपालिका इस तरह से लोगों के टैक्स का पैसा पानी की तरह बहा रही है। इसमें अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए किंतु सभापति सदस्यों को रोक रही है, जबकि उन्होंने भी सदस्यों का हौसला बढ़ाकर इस पर चर्चा करनी चाहिए।

6 साल से नहीं हुआ इंटरनल ऑडिट, एक्ट का खुला उल्लंघन

कांग्रेस सदस्यों ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पिछले 6 वर्षों से नागपुर महानगरपालिका के विभिन्न विभागों का इंटरनल ऑडिट ही नहीं हुआ है। यह म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट की धारा 103 और 104 का स्पष्ट उल्लंघन है जिसके तहत प्रतिवर्ष ऑडिट होना अनिवार्य है। विपक्ष का आरोप है कि बिना ऑडिट रिपोर्ट के ही हर साल बजट पास किया जा रहा है। उनका कहना है कि पिछले 3 वर्षों के प्रशासकीय कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और अधिकारियों की गलत प्रैक्टिस को छिपाने के लिए सत्ता पक्ष द्वारा यह खेल खेला जा रहा है।

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टेंडरों की गुणवत्ता पर समझौता, वीएनआईटी से जांच ठुकराई

बैठक में 35 से 45 प्रतिशत कम दर (बिलो रेट) पर आवंटित किए गए टेंडरों का मुद्दा भी गरमाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इतनी कम दरों पर काम देने से सीधे तौर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता (मटेरियल और वर्कमैनशिप) से समझौता किया जा रहा है। जब कांग्रेस सदस्यों ने इन कार्यों की वीएनआईटी कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग की तो सत्ता पक्ष ने अतिरिक्त खर्च का हवाला देकर इस मांग को ठुकरा दिया।

सड़क पर उतरकर विरोध की चेतावनी

विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने कहा कि प्रशासकीय कार्यकाल में जो भी प्रशासकीय और तकनीकी मंजूरियां दी गई हैं उनकी खामियों पर सवाल उठाना स्टैंडिंग कमेटी का अधिकार है और उनकी पार्टी के सदस्य जनता के पैसे की बर्बादी पर मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। कांग्रेस सदस्यों ने चेतावनी दी है कि वे जनता के पैसे का पाई-पाई का हिसाब मांगेंगे और अगर उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया तो वे सड़क पर उतरकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।

Nagpur municipal corporation standing committee meeting congress allegations corruption

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Published On: Mar 31, 2026 | 12:32 PM

Topics:  

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