मोहन भागवत प्रवचन( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Panchkalyanak Mahotsav Jain: वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां सत्ता का संघर्ष और वैचारिक अज्ञान बुद्धों को जन्म दे रहा है, वहां केवल ‘अहिंसा’ और ‘जियो और जीने दो’ का दर्शन ही सुरक्षा कवच बन सकता है।
यह गंभीर निष्कर्ष तुलसीनगर में आयोजित अतिशय क्षेत्र श्री आदिश्वर धाम, बाजारगांव के पंचकल्याणक महामहोत्सव में उभरकर सामने आया। भगवान के गर्भकल्याणक महोत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और आचार्य समयसागर महाराज की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक वैश्विक वैचारिक मंच में बदल दिया।
इस दौरान दोनों के प्रवचनों ने मानवता और राष्ट्रवाद की एक नई अलख जगाई, सरसंघचालक मोहन भागवत ने अंकों की एक अत्यंत सरल और प्रभावी व्याख्या करते हुए बताया कि अंक ’13’ में ‘3’ का मुख ‘1’ की ओर होता है, जो स्वार्थ और ‘मैं’ की सीमा का प्रतीक है।
इसके विपरीत ’16’ अंक में चेतना का मुख बाहर संसार की ओर मुड़ जाता है, जो विश्वकल्याण का मार्ग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को ‘भारत’ बनाने का श्रेय हमारी गौरवशाली संत परंपरा को जाता है, जो युगों से मानवता का मार्गदर्शन कर रही है।
उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व भले ही देह हो, किंतु भारत माता उसकी आत्मा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संतों का त्यागमय जीवन ही गृहस्थों के जीवन में संतुलन और सुख की गारंटी देता है।
प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय बंडा ने जब आचार्य पदारोहण दिवस की स्मृति कराई, तो उन्होंने आध्यात्मिक गहराई के साथ संतों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।
श्री दिगंबर जैन परवार मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद जैन और मंत्री आशीष जैन ने बताया कि यह महोत्सव समाज को नई दिशा देने वाला है। उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं से बाजारगांव में आयोजित इस पंचकल्याणक महामहोत्सव में सम्मिलित होकर पुण्य अर्जन करने की अपील की। कार्यक्रम में श्री मोहन भागवत का भव्य स्वागत ट्रस्ट के पदाधिकारियों और गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया।
परमपूज्य आचार्य समयसागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म से पूर्ण नहीं होता। वह संस्कारों से विकसित होता है। जैसे एक बीज वृक्ष बनकर सबको शीतलता देता है, वैसे ही मानव जीवन को परोपकार के लिए समर्पित होना चाहिए।
उन्होंने ‘जियो और जीने दो’ के मंत्र को वैश्विक शांति का एकमात्र समाधान बताया और मूक प्राणियों के प्रति करुणा का आह्वान किया कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठाचार्य ने ‘इंडिया नहीं, भारत बोलों’ का दिव्य आह्वान किया, जो आचार्य विद्यासागर महाराज के महान चिंतन को समर्पित था।
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इस अवसर पर नागपुर महानगर संघचालक राजेश लोया, महानगर कार्यवाह रविंद्र बोखारे, भाग संघचालक अरविंद आवड़े, नगर संघचालक जयपाल ढींगरा, भाग कार्यवाह महेश झा, पंकज मिश्रा और मनोज बंड सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।