नागपुर के मानकापुर स्पोर्ट्स हब में हॉकी एस्ट्रोटर्फ की जमीन (फोटो नवभारत)
Nagpur Hockey Astroturf: ऑरेंज सिटी की ‘बदकिस्मत हॉकी’ की तस्वीर बदलने का दावा एक बार फिर अधूरा साबित होता दिख रहा है। मानकापुर स्पोर्ट्स हब में प्रस्तावित करीब 10 करोड़ रुपए के हॉकी एस्टोटर्फ का काम, जो अब तक खिलाड़ियों को समर्पित हो जाना चाहिए था, अब नई अड़चनों में फंस गया है। ताजा घटनाक्रम में सामने आया है कि एस्टोटर्फ निर्माण के लिए जिम्मेदार एजेंसी ने काम से हाथ खड़े कर दिए हैं जिससे पूरा प्रोजेक्ट फिर से शुरुआती प्रक्रिया में लौट गया है।
मानकापुर स्पोर्ट्स हब की मूल योजना से पहले घोषित यह परियोजना वर्षों से कागजों में आगे बढ़ती रही है। 2022-23 में स्वीकृति के करीब 2 साल बाद टेंडर हुए और आज की स्थिति में कार्य पूर्ण हो जाना था लेकिन तय समय बीतने के बाद भी जमीन पर काम शुरू नहीं हो सका। मानकापुर स्पोर्ट्स हब राज्य का दूसरा सबसे बड़ा और अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल प्रोजेक्ट है लेकिन जमीनी हकीकत लगातार निराशाजनक बनी हुई है। शहर की हॉकी पहले ही अव्यवस्था और आपसी खींचतान से जूझ रही है। ऐसे में यह देरी खिलाड़ियों के भविष्य पर भी असर डाल रही है।
ठेका लेने वाली पुणे की निजी कंपनी साइट न मिलने और लगातार देरी से निर्धारित दरों पर काम न करने का हवाला देकर पीछे हटने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि संबंधित भूमि पीडब्ल्यूडी के नियंत्रण में है जहां पहले से स्पोर्ट्स हब का निर्माण जारी है। भारी मशीनों की आवाजाही और मिट्टी निकासी से ग्राउंड को नुकसान होने की आशंका थी इसलिए पीडब्ल्यूडी ने साइट देने से इनकार कर दिया। अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से की जाएगी। इससे प्रोजेक्ट लंबा खिंचना तय माना जा रहा है। एस्टोटर्फ किसी नई एजेंसी के माध्यम से बनाया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 10 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन मानकों के अनुरूप एक इंटरनेशनल हॉकी एस्ट्रोटर्फ सामान्यतः 5 से 7 करोड़ रुपए में तैयार हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें भी स्पोर्ट्स हब के तहत पवेलियन सहित अन्य सुविधाएं पहले से शामिल हैं जो पूरी तरह अलग मद से बनेंगे। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर टर्फ की लागत इतनी अधिक क्यों है और वास्तविक कुल प्रोजेक्ट की लागत क्या है। बहरहाल इस प्रक्रिया के चलते कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे अहम बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहीं प्रभारी उपसंचालक व जिला खेल अधिकारी पल्लवी धात्रक खुद हॉकी की नेशनल खिलाड़ी रही हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि यह प्रोजेक्ट प्राथमिकता में तेजी से आगे बढ़ेगा लेकिन मौजूदा स्थिति उलट तस्वीर दिखा रही है। आज हालत यह है कि हॉकी एस्टोटर्फ कागजों में आगे बढ़ रहा है लेकिन जमीन पर उसका कोई ठोस अस्तित्व नजर नहीं आता। यह स्थिति किसी ‘भगीरथ प्रयास’ जैसी प्रतीत होती है। अब देखना यह होगा कि इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए कौन आगे आता है और कब तक।
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प्रभारी खेल उपसंचालक पल्लवी धात्रक ने कहा कि टेंडर होने के अगले माह ही पीडब्ल्यूडी ने साइट देने से मना कर दिया था। इसके बाद पिछले माह निर्माण एजेंसी पीछे हट गई है। पुन: टेंडर जारी करने की प्रक्रिया कर रहे हैं। आज कल में पीडब्ल्यूडी को पत्र भेजकर मार्च में पूरी प्रक्रिया कर लेंगे। प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने की संभावना नहीं है क्योंकि कुछ कार्य स्पोर्ट्स हब में भी शामिल हैं। एस्टोटर्फ पूरी तरह एफआईएच मानकों का बनेगा और यहां राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं भी होंगी। हम इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में लगे हुए हैं।
– नवभारत लाइव के लिए नागपुर से जयदीप रघुवंशी की रिपोर्ट