चीन की पाबंदियों को भारत का जवाब, नागपुर में सॉल्युबल फर्टिलाइजर पायलट प्लांट तैयार

Soluble Fertilizer Plant Nagpur: नागपुर में देश का पहला स्वदेशी घुलनशील उर्वरक पायलट प्लांट शुरू। चीन के फॉस्फेट निर्यात प्रतिबंधों के बीच भारत की बड़ी जीत। JNARDDC और इशिता इंटरनेशनल की साझा सफलता।
Soluble Fertilizer Plant Nagpur: नागपुर में देश का पहला स्वदेशी घुलनशील उर्वरक पायलट प्लांट शुरू। चीन के फॉस्फेट निर्यात प्रतिबंधों के बीच भारत की बड़ी जीत। JNARDDC और इशिता इंटरनेशनल की साझा सफलता।
सॉल्युबल फर्टिलाइजर पायलट प्लांट (सौजन्य-नवभारत)
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Indigenous Fertilizer Technology: वैश्विक उर्वरक बाजार में चीन की ओर से बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी सामरिक जीत हासिल की है। जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर के सहयोग से विकसित सॉल्युबल फर्टिलाइजर (घुलनशील उर्वरक) पायलट प्लांट के प्रथम चरण का सोमवार को नागपुर में औपचारिक उद्घाटन किया गया।

जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर के निदेशक डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने इस अत्याधुनिक संयंत्र का लोकार्पण किया। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब चीन ने विशेष फॉस्फेट उर्वरकों के निर्यात पर लगे वैश्विक प्रतिबंधों को अगले 6 महीनों (वर्ष 2026 तक) के लिए और बढ़ा दिया है।

चीन के इस कदम से वैश्विक बाजार में आपूर्ति का संकट खड़ा होने की आशंका थी लेकिन भारत ने स्वदेशी तकनीक के माध्यम से इसका प्रभावी विकल्प तैयार कर लिया है। अब तक भारत को इन विशेष मूल्यवर्धित उर्वरकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।

रिकॉर्ड समय में लैब से जमीन पर उतरी तकनीक

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गति रही। इशिता इंटरनेशनल द्वारा विकसित इस ग्रीन टेक्नोलॉजी को इसी वर्ष अप्रैल में खान मंत्रालय के अधीन नोडल एजेंसी जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर का समर्थन मिला था। वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अथक प्रयासों से यह प्रोजेक्ट लैब स्तर से पायलट स्तर तक रिकॉर्ड समय में पहुंच गया और प्लांट का निर्माण निर्धारित समय सीमा से लगभग एक माह पहले ही पूरा कर लिया गया।

कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह प्लांट देश में उन सभी महत्वपूर्ण सॉल्युबल उर्वरकों के घरेलू उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो वर्तमान में विदेशों से मंगाए जाते हैं। उन्होंने बताया यह पहल न केवल उर्वरक क्षेत्र में हमारी स्वदेशी क्षमता को मजबूत करेगी बल्कि आने वाले समय में देश की प्रमुख उर्वरक कंपनियां इस मॉडल को बड़े पैमाने पर अपनाएंगी।

इससे किसानों को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे। आगामी महीनों में इस पायलट प्रोजेक्ट को औद्योगिक स्तर पर विस्तारित करने की योजना है। सेंटर जो खनिज और रणनीतिक क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए जाना जाता है, इस सफलता के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में भी स्वदेशी तकनीक विकसित करने के लिए शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित कर रहा है।

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