₹2000 में एक सिलेंडर! प्रशासन के दावों की खुली पोल, ढाबों में 100-100 सिलेंडरों का अवैध स्टॉक, मचा हाहाकार

Nagpur Gas Crisis: नागपुर में गैस संकट का हाहाकार! वीसीए और गोंडवाना क्लब में खाना बंद, 35% ठेले सड़कों से गायब। ₹2000 में बिक रहा सिलेंडर, कालाबाजारी जोरों पर।
Nagpur faces a severe LPG & CNG crisis due to global war conditions. VCA & Gondwana clubs suspend dining. 35% of street food stalls disappear.
नागपुर में गैस सिलेंडर के लिए लगी कतार (सौजन्य-नवभारत)
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LPG Shortage Nagpur: युद्ध की आग सिटी को अपने लपेटे में पूरी तरह से ले चुकी है। एलपीजी और सीएनजी की कमी की ‘ज्वाला’ फुटपाथ दुकानदारों से लेकर बड़े-बड़े क्लबों और होटलों तक पहुंच चुकी है और किचनों को ‘बंदी’ के कगार पर खड़ा कर दिया है। सिटी की गलियों में ठेलों की संख्या में भारी कमी देखने को मिल रही है वहीं क्लब संचालकों ने नोटिस जारी कर 2 दिनों तक ‘भोजन’ उपलब्ध नहीं कराने की सूचना सदस्यों को दे दी है।

होटल का ‘गैस बैंक’ भी समाप्ति की ओर है और किसी तरह से वे अपना दिन निकाल रहे हैं। अगर यही आलम रहा तो आने वाले 2-3 के बाद पूरे शहर में ‘स्वादिष्ट खाना’ मुश्किल हो जाएगा। एक अच्छी बात यह है कि वर्तमान में ऑटो और वाहनों को ईंधन मिल रहा है। भले ही कुछ पेट्रोल पंपों पर भीड़ ज्यादा बढ़ गई हो लेकिन स्थिति ‘कंट्रोल’ में है लेकिन पेट की आग बुझाने वाले अहम प्रतिष्ठानों की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।

फुटपाथ पर ठेले हुए कम

आमतौर पर शाम ढलते ही फुटपाथों पर ठेलों की कतारें लग जाती थीं लेकिन अब ये कम दिखाई देने लगे हैं। जिन्हें सिलेंडर मिल रहा है वे चांदी काट रहे हैं लेकिन जिनके पास सिलेंडर नहीं है, उन्हें कारोबार से ‘हाथ धोना’ पड़ रहा है। उनके सामने रोजी-रोटी को कायम रखने की चिंता उत्पन्न हो गई है।

जानकारों ने बताया कि व्यंजन बनाने वाले लगभग 30-35 फीसदी ठेले सड़कों से गायब हो चुके हैं। कुछ लोग कोयला पर चले गए हैं तो कुछ लोग इंडक्शन पर काम चला रहे हैं। हीटरों की डिमांड भी काफी बढ़ गई है और ठेलों पर हीटर से व्यंजन पकाते हुए देखा जा रहा है।

कुल मिलाकर स्थिति समय के बीतने के साथ ही नाजुक होती जा रही है। कुछ ठेले वालों के पास संडे तक का स्टाक है। आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो सोमवार से शहर की गलियों में ठेले पर खाना, नाश्ता मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्लब हो गए बंद

वीसीए, गोंडवाना जैसे क्लब भी इससे अछूते नहीं रह गए हैं। वीसीए क्लब प्रबंधन ने अपने सदस्यों को सूचित किया है कि एलपीजी गैस की आपूर्ति फिलहाल अनिश्चित है। इसे देखते हुए क्लब की 'डाइन-इन' (बैठकर भोजन करने की) सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। 13 मार्च से नए नियम को लागू किया जा रहा है। गोंडवाना क्लब ने भी अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देकर 13 से 15 मार्च तक कार्यक्रम को बंद रखने की जानकारी सदस्यों को दी है।

कालाबाजारी जमकर, ढाबों में 100-100 सिलेंडर

प्रशासन भले ही दावा कर रहा हो कि गृहिणियों के लिए गैस उपलब्ध है लेकिन मार्केट में बड़े पैमाने पर कालाबाजारी हो रही है। एक-एक सिलेंडर 2000 रुपये में बेचा जा रहा है। घरेलू सिलेंडर बड़े पैमाने पर कमर्शियल उपयोग के लिए जा रहे हैं। इससे स्थिति और खतरनाक हो चुकी है।

सूत्रों की मानें तो ढाबों, रेस्टोरेंट लाउंज, पब में संचालकों ने 50 से 100 सिलेंडर तक स्टाक में रख लिए हैं। इनके पास इतना बड़ा स्टाक कैसे पहुंचा? यह जांच का विषय है। ऐसे प्रतिष्ठानों पर छापेमारी होती है तो प्रशासन का पोल खुल सकता है।

कतार में खड़े लोग

कालाबाजारियों को जहां आसानी से सिलेंडर मिल रहे हैं वहीं घर का चूल्हा जलाने के लिए लोगों को कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कोई गैस एजेंसी के सामने तो कोई गोदाम पर घंटों लाइन लगाये खड़ा है। दिन-दिनभर निकल जाने के बाद भी इन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहा है। नियमों का हवाला दिया जा रहा है, जबकि वहीं पर बिना बुक कराये लोगों को ‘धन’ के बल पर सिलेंडर आसानी से मिल रहे हैं। शहर से सटे क्षेत्रों में स्थिति और विकट हो चुकी है। गोदामों के सामने लंबी-लंबी कतारें लगी हैं लेकिन प्रशासन के लोग ‘मौन धारण’ किए हुए हैं। घर जाने वाले सिलेंडर दुकानों में पहुंच रहे हैं।

पाइपलाइन में 20 फीसदी की कटौती

पिछले दिनों गैस पाइपलाइन से भी सीएनजी गैस आपूर्ति शुरू कर दी गई है। पहले 100 फीसदी डिमांड पूरी हो रही थी लेकिन अब पंपों और फैक्ट्रियों को 80 फीसदी गैस की ही आपूर्ति हो पा रही है। इन वक्त गैस पाइपलाइन से 27 पंप वाले और बुटीबोरी के बड़े 7-8 फैक्टरी वाले गैस ले रहे हैं। अब इन्हें भी कटौती का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों ने बताया कि चूंकि नंबर अभी कम है, इसलिए 80 फीसदी माल देने में दिक्कत नहीं हो रही है लेकिन मुंबई से ही आपूर्ति में कमी करने का आदेश है।

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