

Nagpur Fake Medicine Supply: नागपुर जिले में नकली दवाओं की आपूर्ति के मामले में गिरफ्तार आरोपी रमण विजयकुमार तनेजा को झटका देते हुए न्यायाधीश एम।एम। नेरलीकर ने जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद हाई कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों को आधार मानते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने कलमेश्वर के ग्रामीण अस्पताल से 'सिप्रोफ्लोक्सासिन 500 मिलीग्राम' की गोलियों के नमूने जांच के लिए भेजे थे। सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट में ये दवाएं पूरी तरह से नकली पाई गईं।
इसके बाद कलमेश्वर पुलिस थाना में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नकली दवाओं की आपूर्ति करने और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया।
पुलिस जांच में इस नकली दवा रैकेट से जुड़े बड़े आर्थिक लेन-देन का भी खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि आरोपी रमण के बैंक खाते में उसके भाई रॉबिन तनेजा ने लगभग 20 लाख रुपये और मामले के सह-आरोपी विजय चौधरी ने 1.50 लाख रुपये जमा किए थे।
इसके अलावा जब पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली तो वहां से 'फीमॉक्स-500' नामक एक अन्य संदिग्ध दवा का बिल भी बरामद हुआ, जिसने उसके खिलाफ शक को और पुख्ता कर दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी के पास दवा बिक्री का वैध लाइसेंस है लेकिन बैंक के लेन-देन और जब्त किए गए सबूतों से प्रथम दृष्टया यही नजर आता है कि वह इस नकली दवा रैकेट की श्रृंखला का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि आरोपी इस गंभीर अपराध में एक अहम कड़ी है, इसलिए सिर्फ इस आधार पर उसे जमानत नहीं दी जा सकती कि वह पिछले 2 साल से अधिक समय से जेल में बंद है।
अदालत ने अपने फैसले में इस तथ्य को भी स्पष्ट किया कि मामले में शामिल आरोपी के भाई रॉबिन तनेजा की जमानत पहले ही रद्द की जा चुकी है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। याचिकाकर्ता (आरोपी) की ओर से एडवोकेट ए। निकम और एडवोकेट पी। घारे तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील एन। जावड़े ने पैरवी की।