'अब और ब्लास्ट नहीं', नागपुर विस्फोटक हादसों पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य सरकार से मांगा जवाब

Nagpur Explosive Units Accident: नागपुर में विस्फोटक इकाइयों में हादसों पर दायर जनहित याचिका में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब मांगा और 10 जून तक हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए।
'No More Blasts': High Court Takes Strict Stance on Nagpur Explosives Accidents; Seeks Response from Central and State Governments
नागपुर विस्फोटक हादसा,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur PIL High Court: नागपुर विदर्भ क्षेत्र में स्थित विस्फोटक निर्माण इकाइयों में हो रहे जानलेवा हादसों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता जम्मू आनंद की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हम और दूसरा ब्लास्ट नहीं चाहते हैं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े किए, साथ ही 10 जून तक हलफनामा प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। अरविंद वाघमारे ने पैरवी की। गलत धारा में जांच और केंद्र की चुप्पी पर उठे सवाल याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष यह अहम मुद्दा उठाया गया कि इतने संगीन और गंभीर मामले में केंद्र सरकार ने 'द एक्सप्लोसिव एक्ट 1884' की धारा 9A के तहत जांच की अधिसूचना ही जारी नहीं की।

याचिकाकर्ता के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी ने इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद धारा 9(1) के तहत एक सामान्य जांच बैठा दी, जो सरासर गलत है। नियमानुसार, धारा 9A के तहत जांच टीम में भारत सरकार के मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, सक्षम जांच अधिकारी और कानून व मामले के विशेषज्ञों का शामिल होना अनिवार्य है। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक चुप्पी साध रखी है, जिसे हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।

'क्या गरीब मरे, इसलिए गंभीरता नहीं?'

सुनवाई के दौरान अदालत का रुख प्रशासन के प्रति बबेहद सख्त रहा। हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'हम और दूसरा ब्लास्ट नहीं चाहते। गरीब लोग मरे हैं इसीलिए मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है?' अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में सही तरीके से जांच नहीं की गई तो कोर्ट सख्त आदेश जारी करेगा।

6 केस, कैसे रिन्यू हुआ कंपनी का लाइसेंस ?

अदालत ने आरोपी कंपनी 'एसबीएल' के लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर भी कड़ा प्रहार किया। हाई कोर्ट ने पूछा कि जब नियमों का पालन न करने को लेकर एसबीएल कंपनी के खिलाफ पहले से ही 6 अदालती मामले (कोर्ट केस) दर्ज थे, ती उसका लाइसेंस रिन्यू कैसे किया गया? अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कंपनी का लाइसेंस रिन्यू नहीं किया गया होता, तो यह दुर्दैवी घटना घटित ही नहीं होती।

सुनवाई के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि केंद्र सरकार के खिलाफ की गई मांग केवल एक 'नीति के निर्माण तक ही सीमित है। इसके साथ ही केंद्र की ओर से यह दलील दी गई कि खुद याचिकाकर्ता की दलीलों के अनुसार भी यह मामला अनिवार्य रूप से राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि केंद्र' के। औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के अपर निदेशक द्वारा दायर हलफनामा के अनुसार इस घटना की विभागीय जाच अभी जारी है।

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