नागपुर: 250 करोड़ की हेराफेरी करने वाले सट्टेबाज को मदद करना पड़ा भारी, इंपेक्टर समेत 9 लोग निलंबित

Nagpur Cyber Police Suspension: नागपुर में 250 करोड़ के सट्टेबाजी मामले में लापरवाही बरतने पर इंस्पेक्टर समेत 9 पुलिसकर्मी निलंबित। सीपी ने दिए जांच के आदेश।
Nagpur Cyber Cell Fraud Police Suspension
साइबर पुलिस स्टेशन में कुप्रशासन का खेल: नागपुर सीपी का सख्त एक्शन (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
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Nagpur Cyber Cell Fraud: नागपुर के साइबर पुलिस स्टेशन में हुई इस कार्रवाई ने पूरे महकमे की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक साथ नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का निलंबन होना राज्य में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है। पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र कुमार सिंघल ने यह कड़ा कदम साइबर पुलिस स्टेशन में लगातार मिल रही कुप्रशासन और लापरवाही की शिकायतों के बाद उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच पूरी होने तक इन सभी को सेवा से बाहर रखा गया है।

निलंबित होने वालों में दो पुलिस इंस्पेक्टर, एक सहायक पुलिस इंस्पेक्टर और छह कांस्टेबल शामिल हैं। शुरुआती जांच में यह पाया गया कि इन अधिकारियों ने सट्टेबाजी के एक बहुत बड़े मामले को बेहद हल्के में लिया और मुख्य संदिग्धों को भागने का मौका दिया। इस अनुशासनहीनता के कारण पुलिस विभाग की छवि जनता के बीच धूमिल हुई है।

250 करोड़ का घोटाला और पुलिस की ढिलाई

पूरा विवाद एक बड़े साइबर अपराध की जांच के दौरान शुरू हुआ। पुलिस की एक टीम जांच के सिलसिले में पुणे गई थी, जहाँ 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। इसी दौरान एकांश नाम के एक बड़े सट्टेबाज का नाम सामने आया, जिसने 40 से अधिक फर्जी बैंक खातों के माध्यम से 250 करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी। इतने पुख्ता सबूत होने के बावजूद, पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी को केवल नोटिस थमाया और उसे जाने दिया। इसका फायदा उठाकर आरोपी तुरंत फरार हो गया, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया बाधित हो गई।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आंतरिक विवाद

मुख्य आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस विभाग के अंदरूनी सूत्र सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए। सट्टेबाज को छोड़ने की खबर जैसे ही वायरल हुई, विभाग के भीतर ही अधिकारियों के बीच गुटबाजी और असंतोष उभरकर सामने आया। जानकारी के अनुसार, कुछ जगहों पर अधिकारियों के बीच तीखी बहस और हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। इस आंतरिक कलह ने वरिष्ठ अधिकारियों को मजबूर कर दिया कि वे इस अराजकता को रोकने के लिए कठोर कदम उठाएं।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल

नागपुर पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र कुमार सिंघल ने स्पष्ट किया है कि पुलिस बल में किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस निलंबन के साथ ही अब उन सभी कड़ियों की जांच की जा रही है कि क्या इन अधिकारियों को सट्टेबाज की मदद करने के बदले में कोई वित्तीय लाभ मिला था। साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच, खुद जांच अधिकारियों का इस तरह संदिग्ध आचरण करना पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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