नागपुर बोर्ड की कार्यप्रणाली कटघरे में, RTI पर विवाद; पेपर लीक के बाद पारदर्शिता पर सवाल
Nagpur Board Paper Leak: 12वीं पेपर लीक के बाद नागपुर शिक्षा मंडल पर सवाल गहरे हुए। RTI में नकल, CCTV और उड़न दस्तों की जानकारी रोके जाने से पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर पेपर लीक, 12वीं परीक्षा विवाद, (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur RTI Information Denied: नागपुर विभागीय शिक्षा मंडल को परीक्षा के दौरान पारदर्शिता और गोपनीयता बनाए रखनी थी, तब कथित तौर पर लापरवाही सामने आई और 12वीं का पेपर लीक का मामला उजागर हुआ। अब जबकि परीक्षाएं समाप्त हो चुकी हैं और परिणाम घोषित होने का समय नजदीक है, तब भी मंडल ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
परीक्षा के दौरान हुई नकल, अनुपस्थित छात्रों की संख्या, कुल परीक्षार्थियों का आंकड़ा, सीसीटीवी व्यवस्था, उड़न दस्तों की कार्रवाई जैसी अहम जानकारियां आरटीआई के तहत मांगी गई थीं लेकिन मंडल के जनसूचना अधिकारी ने इसे ‘कार्यालयीन गोपनीयता का हवाला देते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया।
गौरतलब है कि इस वर्ष 12वीं की परीक्षा में रसायनशास्त्र, भौतिकशाख और गणित विषयों के पेपर वॉट्सएप पर लीक होने का सनसनीखेज मामला सामने आया था, जिसमें 8 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। यह मंडल 6 जिलों में परीक्षाएं संचालित करता है, जहां लाखों छात्र 10वीं और 12वीं की परीक्षा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक की घटना ने मंडल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जवाबदेही से मुकर रहा बोर्ड
इसी पृष्ठभूमि में सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर ने RTI के जरिए जानकारी मांगी थी कि पेपर लीक और नकल रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, कितने मामले दर्ज हुए, कितने छात्र और कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आर. अभय कोलारकर ने मंडल की इस भूमिका पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परीक्षा समाप्त होने के बाद यह जानकारी सार्वजनिक होनी वाहिए इसके बावजूद अधिकारी जानबूझकर जानकारी छिपा रहे है, जो कि सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर नागपुर शिक्षा मंडल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए है।
