Nikay Chunav: 70% पार्षदों का कटेगा टिकट! बीजेपी में रिपोर्ट कार्ड देखकर तय होगी उम्मीदवारी

Nagpur Municipal Elections: नागपुर मनपा चुनाव में बीजेपी ने पूर्व नगरसेवकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया। रिपोर्ट के अनुसार 70 फीसदी पुराने नगरसेवकों की टिकट कट सकती है।
Nagpur Municipal Elections: नागपुर मनपा चुनाव में बीजेपी ने पूर्व नगरसेवकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया। रिपोर्ट के अनुसार 70 फीसदी पुराने नगरसेवकों की टिकट कट सकती है।
निकाय चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Nagpur City Election News: हर दिन चुनावी मोड पर रहने वाली बीजेपी विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद से ही मनपा चुनाव की तैयारी में जुट गई थी। नागपुर मनपा में बीते चुनाव में उसके 108 पार्षद चुनकर आए थे। इस बार उसने 120 प्लस नगरसेवकों का टारगेट रखा हुआ है। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही है लेकिन भीतरखाने की मानें तो 70 फीसदी के करीब पूर्व नगरसेवकों की टिकट इस बार कटने वाली है।

मुख्य कारण नये व युवा चेहरों को मौका दिया जाना बताया जा रहा है लेकिन इसके पीछे के कुछ और कारण भी है। प्रदेश भाजपा ने जनवरी महीने में ही एक सर्वे करवाया था जिसमें सभी पूर्व नगरसेवकों का उनके कार्यकाल में किए गए कार्यों, जनता से उनके संपर्क, प्रशासक राज के दौरान उनके द्वारा पार्टी, संगठन के लिए किए गए कार्य व जनता के बीच की सक्रियता आदि का सर्वे कर रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया।

इस चुनाव में उम्मीदवारी तय करते समय वह रिपोर्ट कार्ड भी मानक होगा। इसके अलावा चुनाव लड़ने के इच्छुक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का भी लोकसभा व विधानसभा चुनाव के दौरान भी रही सक्रियता का आकलन किया जाएगा। उसी के हिसाब से इस बार टिकट का वितरण होगा। कयास लग रहे हैं कि निष्क्रिय पूर्व नगरसेवकों के टिकट इस बार कट सकते हैं।

नहीं लिया जा सकता रिस्क

जानकारी के अनुसार यह भी देखा जाएगा कि लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव के दौरान किन-किन पूर्व नगरसेवकों और आगामी मनपा चुनाव लड़ने के इच्छुक पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा कितनी मेहनत की गई। वैसे भी वर्ष 2017 में चुनकर आए अनेक नगरसेवकों के प्रति नागरिकों में उनके एटीट्यूड के चलते नाराजी थी।

अनेक महिला नगरसेवकों की ओर से तो उनके पतियों ने भी कारभार संभाला था। कई ने तो जीतने के बाद प्रभाग में चक्कर तक नहीं लगाए। उनके रवैये के चलते अगर 2022 में ही चुनाव हो गए होते तो बीजेपी को तगड़ा फटका लगने वाला था।

बीते साढ़े 3 वर्ष से प्रशासक राज होने के चलते नागरिक उन नगरसेवकों को भूल गए हैं लेकिन नाराजी दूर हुई या नहीं, यह कहना मुश्किल है। नगरसेवकों के नहीं होने से पूरे शहर में विधायकों ने ही काम किया है। ऐसे में पार्टी उम्मीदवारी तय करने में किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती।

सीनियर्स की जगह लेंगे युवा चेहरे

मनपा का कार्यकाल समाप्त होने और प्रशासक की नियुक्ति के बाद पार्टी के आला नेताओं ने नगरसेवकों को हिदायत दी थी कि वे अपने जनसंपर्क कार्यालय बंद न करें और नियमित जनता के संपर्क में रहें। उनके कार्य करें, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में उनकी मदद करें लेकिन कुछ गिने-चुने नगरसेवकों को छोड़कर अधिकतर ने अपने कार्यालय बंद कर दिये थे। यह भी चर्चा है कि इस बार 3 बार या उससे अधिक समय तक नगरसेवक रह चुके व मनपा में सत्तासुख भोग चुके अधिकतर की टिकट काटकर युवा कार्यकर्ताओं को अवसर दिया जाएगा।

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