कैब चालक की हड़ताल (AI generated image)
Nagpur Airport Taxi Fares: नागपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कैब सेवाएं बुधवार को भी पूरी तरह ठप रहीं। यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रशासन दिनभर केवल मूकदर्शक बना रहा। चालकों का आरोप है कि वे लाइसेंस लेकर सेवाएं दे रहे हैं लेकिन अधिकारी गैर लाइसेंसी को पनाह दे रहे हैं।
इससे उनकी आय खत्म हो रही है। चालकों ने ‘नो पिकअप, नो ड्रॉप’ हड़ताल शुरू की है जिससे हवाई अड्डे (Nagpur Airport) पर टैक्सियों का प्रवेश अवरुद्ध हो गया। ऊंची फीस और बाइक टैक्सी पर पाबंदी की मांग को लेकर भड़के चालकों ने यात्रियों को तेज धूप में लगभग एक किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर कर दिया या 50 रुपये वसूलने वाले ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा।
चालकों का कहना है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी हो रही है। हमारे पास कोई चारा नहीं बचा। टैक्सी चालक मालक संयुक्त कृति समिति के दीपक साने ने कहा कि हम संगठन एप-आधारित प्लेटफॉर्म्स से जुड़े चालकों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो लाइसेंस लेकर काम कर रहे हैं।
संघ नेता दीपक साने ने बताया कि वर्तमान में चालक प्रति किलोमीटर 9 से 15 रुपये ही कमा पाते हैं।
उन्होंने न्यूनतम 28 रुपये प्रति किलोमीटर फीस की मांग की। साथ ही बाइक टैक्सी पर नियमन या हटाने की अपील की। इस संबंध में बुधवार को विमानतल (Nagpur Airport) के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी सौंपा गया है। उनका कहना है कि कोई भी बाइक वाला इन प्लेटफॉर्म्स पर शामिल हो जाता है। रोजाना करीब 15,000 बाइक राइड्स हो रही हैं जो हमारा कारोबार चट कर रही हैं। हम तो आरटीओ नियमों का पालन करते हैं लेकिन बाइक टैक्सी पर कोई नियम नहीं।
संगठन के ऋषि कुवर, मिलिंद ठवरे ने कहा कि हड़ताल सोमवार को आधी रात से शुरू हुई जब चालकों ने हवाई अड्डा जाने वाली बुकिंग्स रोकीं। विरोध में न उतरी टैक्सियों को भी एंट्री पॉइंट्स पर रोका गया। बाद में पुलिस पहुंची और वाहनों को रोकने की चेतावनी दी, लेकिन चालक अडिग रहे। उन्होंने मांगें पूरी न होने पर हड़ताल अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की धमकी दी।
मुझे उतरकर पैदल चलना पड़ा। सौभाग्य से सामान कम था। एक अन्य यात्री ने सोशल मीडिया पर गुस्सा उतारा, जब उसे कैब से उतार दिया गया। कुछ यात्री प्रीपेड टैक्सी या ऑटो रिक्शा का रुख कर गए लेकिन उन्हें भी निर्दिष्ट पॉइंट्स तक पहुंचना पड़ा।
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एक साल पहले संघ ने एग्रीगेटर्स पर निर्भरता कम करने के लिए अपना एप लॉन्च करने का प्रस्ताव दिया था। नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) को प्रस्तुति दी गई थी लेकिन फंडिंग और तकनीकी बाधाओं से योजना आगे नहीं बढ़ सकी।