

Nagpur Nag River Project: नागपुर जिले में नाग नदी कायाकल्प एवं प्रदूषण नियंत्रण परियोजना एक बार फिर प्रशासनिक लेटलतीफी और कानूनी जटिलताओं में घिरती नजर आ रही है। लगभग एक दशक पूर्व प्रस्तावित इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए प्रस्तावित जमीनों के चयन और संस्थानों के साथ जारी गतिरोध के चलते काम अधर में लटका है।
अब नारी में बनाए जाने वाले एसटीपी प्लांट के लिए राज्य सरकार के वन विभाग से जमीन मांगने का प्रस्ताव स्थायी समिति के समक्ष रखा गया। इसे मंजूरी तो प्रदान की गई किंतु यह जमीन झुपड़ी जंगल में होने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा झुड़पी जंगल की जमीन दूसरे विकास कार्यों के लिए आवंटन पर रोक लगाए जाने से मामले पर अब ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है।
नागपुर जिले में नाग नदी प्रदूषण उन्मूलन एवं जल शुद्धिकरण परियोजना के अंतर्गत पीली नदी पर बनने वाले 85 एमएलडी क्षमता के नए मलजल शुद्धिकरण केंद्र के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के शासकीय प्रस्ताव पर स्थायी समिति की बैठक में चर्चा की गई।
1,926.99 करोड़ की मुख्य परियोजना को लेकर 14 मार्च 2023 को जारी आदेश के अनुसार केंद्र-राज्य-महानगर पालिका की वित्तीय हिस्सेदारी (60:25:15) और मौजा नारी क्षेत्र में वन विभाग की 2.39 एकड़ तथा राज्य सरकार की 6.5 एकड़ भूमि को बिना किसी शुल्क के प्राप्त करने के प्रस्ताव पर सहमति जताई गई।
बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि झुड़पी जंगल की जमीन को किसी भी परिस्थिति में गैर-चनीय उपयोग में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस भूमि को लेकर प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया।
नागपुर जिले में नाग नदी कायाकल्प एवं प्रदूषण नियंत्रण परियोजना को लेकर जानकारों का कहना है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए इसे शासन स्तर पर भेजने की तैयारी में है जिससे यह परियोजना कानूनी पचड़े में फंसकर और अधिक विलंबित हो सकती है। इसके अलावा पीकेवी और वीएनआईटी की जमीनों पर भी एसटीपी प्लांट तैयार किया जाना है। हालांकि पीकेवी का मसला तो हल हो गया किंतु वीएनआईटी की जमीन को लेकर मामला उलझा हुआ है।