नागपुर महानगरपालिका में 'रिटायर्ड' अधिकारियों की चांदी! OSD पद के बहाने पसंदीदा चेहरों की 'घर वापसी'

Municipal Corporation OSD Appointment: मनपा में OSD पदों पर नियुक्ति को लेकर घमासान। सेवानिवृत्त अधिकारियों प्रफुल्ल फरकासे और संजय मेंढुले की 'घर वापसी' पर विपक्ष ने उठाए सवाल।
Controversy erupts over the appointment of two OSDs in the Municipal Corporation. Opposition alleges 'rehabilitation' of retired officials Praful Farkase and Sanjay Mendhule.
नागपुर महानगरपालिका (सौजन्य-फाइल फोटो)
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OSD Contract Recruitment Controversy: आर्थिक तंगी से जूझ रही महानगरपालिका में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन ने राजनीतिक इच्छाशक्ति के चलते 2 विशेष कार्य अधिकारियों (ओएसडी) की नियुक्ति की तैयारी की है जिसे विपक्षी दलों ने सेवानिवृत्त अधिकारियों का ‘पुनर्वास’ करार दिया है।

खास बात यह है कि मनपा में अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद यह संभवतः पहली बार है जब राजनीतिक कार्यालयों के लिए अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर ओएसडी नियुक्त किए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार इन नियुक्तियों से मनपा पर मानदेय के रूप में प्रति माह 1 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। प्रशासन द्वारा जारी विज्ञापन की शर्तों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विज्ञापन इस तरह तैयार किया गया है जिससे केवल ‘इच्छित’ अधिकारियों का ही चयन हो सके।

जानबूझकर रखी गईं शर्तें

स्थापना विभाग द्वारा जारी विज्ञापन के अनुसार मेयर और स्थायी समिति के लिए एक-एक ओएसडी नियुक्त किया जाना है। इसके लिए 25 मार्च को सुबह 10.30 बजे अतिरिक्त मनपा आयुक्त के कार्यालय में ‘वॉक-इन इंटरव्यू’ आयोजित किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इन कार्यालयों में किसकी नियुक्तियां होंगी, यह पहले से ही तय है।

ऐसे में यह साक्षात्कार खानापूर्ति मात्र है। पूरा मामला ही प्रायोजित होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शर्तें उसी तरह से रखी गई। शर्तों के अनुसार संबंधित उम्मीदवार महाराष्ट्र सरकार या अर्ध-सरकारी सेवा का वर्ग-1 या वर्ग-2 का सेवानिवृत्त अधिकारी होना चाहिए। उम्मीदवार के पास स्नातक की डिग्री और महानगरपालिका या प्रशासनिक कार्यों का अनुभव अनिवार्य है।

यहां तक कि उम्मीदवार द्वारा पहले से महापौर या उसके समकक्ष कार्य करने का अनुभव होना चाहिए। इसी तरह से जिसे स्थायी समिति के लिए नियुक्त करना है, उसके पास स्थायी समिति में काम करने का अनुभव होना चाहिए। इसका यही अर्थ है तो जिसने पहले से यहां कार्य किया है उसकी ही नियुक्ति होने जा रही है।

इन नामों की है चर्चा

चर्चा है कि मनपा के 2 पूर्व अधिकारी प्रफुल्ल फरकासे और संजय मेंढुले इन पदों पर नियुक्त किए जा सकते हैं। प्रफुल्ल फरकासे मनपा के सचिव (वर्ग-1) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उन्होंने कई वर्षों तक स्थायी समिति कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के रूप में कार्य किया है। इसी तरह से संजय मेंढुले वर्ग-2 के अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं और पूर्व महापौरों (संदीप जोशी और दयाशंकर तिवारी) के ओएसडी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

बजट निर्माण में मदद का तर्क

स्थायी समिति कार्यालय का तर्क है कि आगामी बजट तैयार करने में सहायता के लिए इन नियुक्तियों की आवश्यकता है। हालांकि पूर्व में यह कार्य मुख्य रूप से लेखा और वित्त विभाग द्वारा किया जाता था।

विपक्ष का कड़ा विरोध : ‘यह प्रशासनिक घुसपैठ है’

विपक्षी पार्षदों ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि मनपा में पहले से ही कई अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं जो इन कार्यों को बखूबी संभाल सकते हैं। मौजूदा अधिकारियों या कर्मचारियों का उपयोग करने के बजाय अनुबंध के आधार पर बाहर से लोगों को लाना एक प्रकार की ‘घुसपैठ’ है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह केवल सेवानिवृत्त अधिकारियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं बल्कि राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में विशेष राजनीतिक दल की विचारधारा वाले व्यक्ति की नियुक्ति करने की मंशा है।

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