

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी की जीत का दावा किया गया है।
भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को हार का सामना करना पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने नतीजे को भाजपा के लिए राजनीतिक झटका बताया।
भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन और पूर्व महापौर अनिल सोले की नाराजगी चर्चा में रही।
Abhijeet Wanjari Congress Win: देश में पिछले 12 वर्षों से और महाराष्ट्र में 10 वर्षों से सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए बुधवार का दिन पीड़ादायक साबित हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय वाले नागपुर शहर में जिसने समूचे भारत को एकछत्र मजबूत सरकार दी वहां की विधान परिषद की स्नातक सीट में पराजय झेलनी पड़ी।
बीजेपी के प्रत्याशी सुधाकर कोहले की हार सिर्फ नागपुर या महाराष्ट्र बीजेपी के लिए झटका नहीं है। असल में यह एक ऐसा जहरबुझा तीर है जो पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं को भी बहुत दिनों तक चुभता रहेगा।
23 अक्टूबर को 4 राज्यों की 29 विधान परिषद सीटों पर मतदान हुआ था। सभी के परिणाम मंगलवार से आना शुरू हुए थे। बुधवार रात तक इनमें से अधिकांश के परिणाम आ भी गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परिणामों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया और ट्वीट किया कि बैलेट पर चुनाव हुए और कांग्रेस को कितनी सीटें मिली। यह ट्वीट बहुत वायरल हुआ और मीडिया ने कांग्रेस के शून्य पर जन-जन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
कांग्रेस के नेता भी इस शून्य प्रदर्शन से आहत थे लेकिन जैसे ही बुधवार की रात को नागपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी ने विजयी बढ़त बनाए जाने की खबर मिली, पार्टी का जीरो वाला कलंक मिट गया।
नागपुर में मिली जीत से उत्साहित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कांग्रेस को जीरो साबित करने की बहुत जल्दी थी। जिस शहर में आरएसएस के अलावा नितिन गडकरी।
देवेंद्र फडणवीस जैसे दिग्गज नेता आते हैं, वहां बीजेपी की यह दुर्गति साबित करती है कि धन बल और सत्ता के अहंकार का घमंड जनता ने चूर-चूर कर दिया। महाराष्ट्र में स्नातक की 3 सीटों पर जिस तरह महाविकास आघाडी ने जीत हासिल की है।
यह युवाओं के परिवर्तन की बानगी है। सपकाल ने कहा कि नागपुर के अलावा मोदी अपने बनारस की ही सीट नहीं बचा सके। यहां तक कि बिहार में पटना सिटी में भी बीजेपी बुरी तरह हारी और योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में हारते-हारते बची। मोदी को अपने ट्वीट में यह सब लिखना चाहिए था।
अभिजीत बंजारी की जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। बीजेपी खेमे में मायूसी का आलम यह है कि आम कार्यकर्ता इसे तथाकथित चाणक्यों की विफलता बता रहे है। आम कार्यकर्ताओं का मानना था कि विधानसभा चुनावों के समय भी पार्टी की जब सुनामी आई बी. तब भी सिटी में 2 सीटी पर हार का सामना करना पड़ा था।
इन 2 सीटों में से एक सीट पश्चिम नामपुर विधानसभा वी, जहां सुधाकर कोहले ही प्रत्यागी थे। तब विधायक विकास ठाकरे के हामी कोहले को पराजय झेलनी पड़ी थी। उसके बाद से यह कहा जा रहा था दिधान परिषद चुनाव में पार्टी किसी नए का चेहरे पर दांव लगा सकती है।
परिषद के चुनावों में कोहले नाम घोषित होने के बाद ही पूर्व महापौर अनिल सोले ने खुली बगावत कर दी थी, पार्टी जानती थी कि सोले की बगावत का भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
यही कारण है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घर जाकर सोले की समझाइश की बी। सोले ती मान गए थे लेकिन कैडर बहुत खुश नहीं था। बुधवार को जब पाटी की पराजय हुई तो कार्यकर्ता ने ऑफ दी रिकॉर्ड कहा कि ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती।