30 साल से बसे परिवारों पर संकट? नागपुर मिहान की नाप-जोख से 300 परिवारों में दहशत, निवासियों ने उठाए सवालC

Nagpur MIHAN Project: जयताला क्षेत्र के करीब 300 परिवारों ने मिहान प्रशासन पर बिना पूर्व सूचना जमीन की नाप-जोख करने का आरोप लगाया है। इससे क्षेत्र में डर और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
Crisis for families settled for 30 years? Survey for Nagpur MIHAN sparks panic among 300 families; residents raise questions.
मिहान परियोजना, जयताला, जमीन सर्वे,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur MIHAN Land Survey: नागपुर जिले में पिछले 3 दशकों से रह रहे नागरिकों ने मिहान परियोजना प्रशासन पर बिना किसी पूर्व सूचना के जमीन की नाप-जोख करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। इस कार्यवाही से जयताला क्षेत्र के दाते ले-आउट, सुजाता ले-आउट और कलसकर ले-आउट के लगभग 300 परिवारों में डर और भ्रम का माहौल पैदा हो गया है। निवासियों के अनुसार वे पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र में अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं और वर्तमान में यहां लगभग 200 से 300 परिवार निवास करते हैं।

यह क्षेत्र पूरी तरह से विकसित हो चुका है और नागरिकों ने सरकारी उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में पंजीकृत सेल डीड (खरेदीखत) के माध्यम से ये भूखंड खरीदे हैं। निवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से नागपुर महानगरपालिका का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) और अन्य सरकारी कर भर रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश नागरिकों के पास बिजली, पानी के कनेक्शन सहित सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके अलावा कई लोगों ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से कानूनी सत्यापन के बाद होम लोन लिया है और लाखों रुपये निवेश करके अपने घर बनाए हैं।

बिना नोटिस कार्यवाही का लगाया आरोप

नागरिकों के आरोप के अनुसार हाल ही में मिहान परियोजना से जुड़े कुछ लोग बिना किसी सरकारी आदेश, पूर्व सूचना या पहचान पत्र के बस्ती में दाखिल हुए। उन्होंने जमीन की नाप-जोख कर वहां खंभे गाडने का प्रयास किया जिससे निवासियों में बेचैनी निर्माण हो गई। क्षेत्र के निवासियों ने मांग की है कि प्रशासन नागरिकों से संवाद कर स्थिति स्पष्ट करे और कोई भी कार्यवाही करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करे।

भूमि अधिग्रहण में कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप

निवासियों ने उल्लेख किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के अनुसार किसी भी निजी संपत्ति का अधिग्रहण करने से पहले संबंधित नागरिकों को व्यक्तिगत नोटिस देना, जनसुनवाई करना और बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा तय करना आवश्यक है। हालांकि इस मामले में कानून की आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किए जाने का आरोप उन्होंने लगाया है।

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