

Nagpur Medical Store Strike: नागपुर हड़ताल के चलते शहर में दवा दुकानों के बंद रहने का असर बुधवार को आम मरीजों और उनके परिजनों पर साफ दिखाई दिया। मेडिकल स्टोर्स बंद रहने के कारण लोगों को जरूरी दवाइयों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। खासकर बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और रोजाना दवा लेने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शहर में दवा दुकानों के शटर बंद रहने से जरूरतमंद लोग दवाई के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए, मेयो, मेडिकल, डागा अस्पताल के पास रोगी, परिजन हाथ में दवाई की चिट्ठी लिए घूमते देखे गए, मेडिकल स्टोर्स बंद रहने से अस्पतालों और क्लीनिकों में उपचार कराने पहुंचे मरीजों को डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयां तुरंत नहीं मिल सकीं, कई लोगों ने वैकल्पिक रूप से खुले मेडिकल स्टोर्स की तलाश की लेकिन वहां भी दुकान पर ताला लगा मिला। मेडिकल चौक, सीताबर्डी, धरमपेठ, सदर, मानेवाड़ा, कमाल चौक, इमामबाड़ा, मेयो चौक, गांधीबाग समेत कई क्षेत्रों में दवा दुकानों के बंद रहने का असर दिखाई दिया।
मरीजों के परिजनों ने बताया कि अचानक दवा दुकानें बंद होने से उन्हें काफी दिक्कत हुई, विशेषकर उन मरीजों को जिन्हें नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग की दवाइयां लेनी पड़ती हैं। अस्पतालों के आसपास भी सामान्य दिनों की तुलना में मेडिकल स्टोर्स पर सन्नाटा नजर आया। कई निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन आवश्यक इंजेक्शन और दवाइयों की व्यवस्था करने के लिए दूसरे इलाकों तक पहुंचे।
शहर के कुछ निजी अस्पतालों में केडी राहत रही। निजी अस्पतालों की दवाई दुकानें कुछ हद तक शुरू दिखी, ताकि रोगियों को कुछ आवश्यक दवाइयां दी जा सकें, कई निजी अस्पतालों में दवा दुकान बंद ती रखी गई लेकिन डॉक्टरों के विशेष आग्रह पर कुछ मरीजों को दवाई उपलब्ध कराई गई। इसी तरह कुछ चौराहों पर दुकानें शुरू दिखीं, मेयो चौक पर एक दवा दुकान शुरू होने से वहां लोगों की भीड़ लगी दिखी।