नागपुर के मौदा में कृषि विक्रेताओं की हड़ताल, 168 दुकानें बंद, किसान हो रहे परेशान

Nagpur Agriculture Vendors Protest: नागपुर जिले में कृषि विक्रेताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है। मौदा के 168 दुकानों को ताला लगने के बाद बीज, खाद और कीटनाशक की आपूर्ति हो।
Mauda Krishi Kendra Strike
मौदा में कृषि केंद्रों पर लटका ताला (सोशल मीडिया)
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Mauda Krishi Kendra Strike: नागपुर के मौदा में कृषि विक्रेताओं की हड़ताल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। 168 दुकानों की तालाबंदी केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उन नीतियों के खिलाफ विद्रोह है जो विक्रेताओं और किसानों दोनों को नुकसान पहुंचा रही हैं। सीजन की शुरुआत में संसाधनों की यह कमी एक गंभीर कृषि संकट का संकेत है।

हड़ताल के कारण और विक्रेताओं की मांगें

महाराष्ट्र राज्य कृषि विक्रेता संगठन (माफदा) के नेतृत्व में सोमवार, 27 अप्रैल से शुरू हुई यह हड़ताल नीतिगत बदलावों और प्रशासनिक हस्तक्षेप के खिलाफ एक बड़ा विरोध है। मौदा तहसील के सभी 168 कृषि केंद्रों ने अपने शटर गिरा दिए हैं। विक्रेताओं का सबसे बड़ा विरोध 'लिंकिंग' प्रणाली को लेकर है, जिसके तहत कंपनियां खाद और बीजों के मुख्य स्टॉक के साथ गैर-जरूरी उत्पाद खरीदने का दबाव बनाती हैं। इसके अलावा, विक्रेताओं ने बाजार में फैल रहे अवैध बीटी और HTBT बीजों की बिक्री पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका तर्क है कि अवैध एजेंट खुलेआम कारोबार कर रहे हैं, जबकि वैध लाइसेंस धारकों को 'इंस्पेक्टर राज' और जटिल नियमों के जरिए परेशान किया जा रहा है। कीटनाशक कंपनियों द्वारा एक्सपायरी माल वापस न लेने की नीति ने भी छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। विक्रेताओं का कहना है कि जब तक इन विसंगतियों को दूर नहीं किया जाता, व्यवसाय का सुचारू संचालन संभव नहीं है।

कृषि क्षेत्र और किसानों पर प्रभाव

मौदा की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह हड़ताल एक बड़े खतरे की घंटी है। खेती का सीजन नजदीक होने के कारण किसानों को खाद और उन्नत बीजों की सख्त जरूरत है। दुकानों के बंद होने से न केवल आपूर्ति बाधित हुई है, बल्कि कृषि रसायनों की समय पर उपलब्धता न होने से फसलों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लग गया है।

किसानों को डर है कि यदि यह गतिरोध लंबा चला, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कृषि केंद्रों के बंद रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी हो जाएगी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है। स्थानीय किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि विक्रेताओं की मांगों पर जल्द विचार किया जाए ताकि बुवाई के महत्वपूर्ण समय पर उन्हें कृषि सामग्री के लिए भटकना न पड़े। विक्रेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सुरक्षा और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता तब तक मौदा तहसील के 168 केंद्रों पर तालाबंदी जारी रहेगी।

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