

Free School Bag Scheme Maharashtra: महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा विभाग ने राज्य की स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं (जिला परिषद, नगर पालिका व मनपा) के स्कूलों में पहली से 8वीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए 'मुफ्त स्कूल बैग योजना' को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के कार्यान्वयन के लिए प्राथमिक शिक्षा संचालनालय द्वारा भेजे गए 174 करोड़ 19 लाख 35 हजार 424 रुपये के विशाल बजट प्रस्ताव को शासन द्वारा हरी झंडी मिल चुकी है।
हालांकि, जहां एक ओर राज्य के सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बंदी की कगार पर हैं, वहीं दूसरी तरफ बिना किसी मांग के करोड़ों रुपये के इस बजटीय प्रावधान पर शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत यह है कि नागपुर जिले सहित राज्यभर के अनेक सरकारी स्कूलों में आज भी शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। कई ग्रामीण व शहरी शालाओं में पीने के साफ पानी, आधुनिक शौचालयों, सुरक्षा दीवारों, बिजली कनेक्शन, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और इंटरनेट जैसी अनिवार्य सुविधाओं का घोर अभाव है। बुनियादी ढांचे की इसी लाचारी के चलते जिला परिषद और नगर पालिका के स्कूलों में छात्र संख्या लगातार घट रही है और स्कूल बंद हो रहे हैं। ऐसे में प्राथमिक समस्याओं को सुलझाने के बजाय करोड़ों की लागत से मुफ्त बैग बांटने के फैसले ने सरकार की प्राथमिकताओं पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) का हवाला देते हुए शिक्षा विभाग ने दावा किया है कि इस योजना से विद्यार्थियों को आनंददायी वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। प्राथमिक शिक्षा संचालक को ई-निविदा (E-Tender) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से खरीद प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। शासनादेश में साफ कहा गया है कि बैग की डिजाइन और सप्लाई के लिए अलग-अलग दरें दर्शाने वाली निविदाएं निरस्त की जाएंगी।
गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में पहले से ही मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और जूते उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना' के तहत दोपहर का भोजन (Mid-Day Meal) भी दिया जाता है। अब इसमें मुफ्त स्कूल बैग जुड़ जाने से बेशक गरीब अभिभावकों का व्यक्तिगत आर्थिक बोझ थोड़ा कम होगा, लेकिन शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और जर्जर स्कूल भवनों को सुधारे बिना केवल बैग बांटने से सरकारी स्कूलों की दशा सुधरेगी या नहीं, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है।